छठ महापर्व : डूबते सूर्य को आज अर्घ्य देंगे व्रती
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। छठ पर्व के लिए श्रद्धालुओं ने तैयारी पूरी कर ली है। वीरवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे व्रती। बुधवार को खरना के लिए महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर भगवान सूर्य को खीर-पूड़ी, पान-सुपारी और केले का भोग लगाया। इसके लिए विशेष रूप से मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर खीर तैयार की। मिट्टी के नए चूल्हे पर दूध, गुड़ व अरवा चावल से खीर और गेहूं के आटे की रोटी का प्रसाद बनाया गया। प्रसाद बन जाने के बाद शाम को सूर्य की आराधना कर उन्हें भोग लगाया गया और खरना के शुभ मुहूर्त के समय शाम सात बजे से रात दस बजे तक पूजा अर्चना कर व्रत खोला और खीर का प्रसाद ग्रहण किया। श्री राम राज्य संस्था के संस्थापक रमेश चौधरी ने बताया कि वीरवार को गोहाना, जाटल, असंध रोड स्थित छोटी नहरों में शाम चार बजे से सात बजे तक लोग अर्घ्य देंगे। संस्था ने जिला प्रशासन से मिलकर जेसीबी की सहायता से विभिन्न स्थानों की सफाई करवा दी गई है।
छठ पूजा का इतिहास
छठ पूजा का महत्व पूरे उत्तर भारत में सबसे अधिक है। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम-सीता के स्वयंवर करके लौटे थे और उनका राज्य अभिषेक किया गया था। उसके बाद उन्होंने पूरे विधान के साथ शुक्ल पक्ष की छठी को पूरे परिवार के साथ पूजा की थी। तभी से इस पूजा का महत्व है। वहीं दूसरी और महाभारत काल में पांडवों ने भी अपना सर्वस्व गवां दिया था तो द्रोपदी ने इस व्रत का पालन किया। वर्षों तक इसे नियमित करने पर पांडवों का उनका सर्वस्व मिला था। यह व्रत पारिवारिक खुशहाली के लिए भी किया जाता है। इस दिन छठी माता की पूजा की जाती है और छठी माता बच्चों की रक्षा करती है। वहीं इस व्रत को अधिकतर लोग संतान प्राप्ति की इच्छा से भी करते है।
छठ पूजा का शुभ मुहूर्त
सूर्यादय - 06:41 बजे सुबह
सूर्यास्त- 06:05 बजे शाम
बुधवार को निर्जला उपवास रखकर व्रतियों ने चावल, दूध व गुड़ से खीर का बनाया प्रसाद
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