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-सिविल अस्पताल में डॉ. रजनी गोयल खरे का व्यवहार देख बच्चियों के अभिभावक भी खुश हुए

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इसी डाक्टरणी पहली बार देख्यी जो छोरियां नै दवाई भी देवै अर नवरात्रा का प्रसाद भी
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कृपा समाचार को फोटो समेत उचित जगह दें- समाज को नई दिशा मिलेगी-
फोटो-10
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। इसी डाक्टरणी पहली बार देख्यी जो छोरियां नै दवाई भी देवै अर नवरात्रां का प्रसाद भी देवै, अर प्रसाद मैं भी प्लेट या दूसरी चीजां की जगह नाखून काटण की और ज्यामेट्री भी दी है।
कुछ इस तरह का वाक्या शरद नवरात्रे की अष्टमी के दिन वीरवार को स्थानीय सरकारी अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी गोयल खरे के ओपीडी के बाहर अपनी पौती वंशिका को दवाई दिलवाने के बाद उसकी दादी कमलेश के मुंह से सुनने को मिला।
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विजय कॉलोनी निवासी कमलेश अपनी पौती वंशिका को वीरवार के दिन सरकारी अस्पताल में डॉ. रजनी गोयल खरे से चर्म रोग की दवाई दिलवाने के लिए लेकर आई थी। दवाई लेने के बाद जैसे ही डॉ. रजनी ने उन्हें अष्टमी पूजन का प्रसाद और अन्य सामान देने के लिए हाथ बढ़ाया तो कमलेश भी हैरान रह गई। क्योंकि उनके जीवन में यह पहला वाक्या था जब कोई डाक्टर दवाई देने के साथ-साथ प्रसाद देकर यह समझा रहा हो कि इस प्रसाद में नाखून काटने के लिए नेलकटर, साबुन और ज्यामेट्री भी है।
कुछ इसी तरह का वाक्या हनुमान कॉलोनी निवासी रिहास के साथ हुआ। जब वह चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अपनी बेटी उजाफा को लेकर डॉ. रजनी गोयल खरे के पास आया तो उसे भी ऐसा ही महसूस हुआ। उसने कहा कि वह पहली बार सरकारी अस्पताल में चर्म रोग से संबंधित दवाई लेने आया है। उसने बताया कि उन्होंने डाक्टर मेडम के बारे में अखबारों में पढ़ा था कि सरकारी अस्पताल में अब चर्म रोग की डाक्टर आ गयी हैं। उसने बताया कि वह मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है और उनके यहां नवरात्र नहीं होते, लेकिन इस तरह से किसी डाक्टर की लड़कियों के प्रति इतनी गंभीरता और इस तरह की सोच देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। इससे भावनात्मक झलक भी दिखाई देती है। इसी तरह झट्टीपुर निवासी राधिका अपनी बहन निशा के साथ दवाई लेने के लिए आई थी। उसने भी खुशी जाहिर की।
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डॉ. रजनी गोयल खरे ने बताया कि हम सभी नवरात्रों में कंजकों को अष्टमी या नवमी के दिन कढ़ाई करते समय खाना खिलाते हैं। यह धर्म के साथ-साथ बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी बनाता है, लेकिन उनकी बतौर डाक्टर भी एक जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चियों को साफ-सफाई और पढ़ाई के प्रति भी सजग बनाएं। इसी लिए उन्होंने अबकी बार अष्टमी पर ओपीडी में इलाज के लिए आने वाली बच्चियों का पूजन करने का फैसला लिया। मेरे मन में था कि उनको कुछ ऐसी चीज दी जाएं जो उनके स्वास्थ्य व शिक्षा से जुड़ी हुई हों। मैंने इसी सोच के साथ नेलकटर और हाथ धोने के लिए साबुन, हाथ पोछने के रूमाल और बालों के लिए कंघी भी दिया। डॉ. रजनी गोयल खरे ने अभिभावकों को भी अपने बच्चों की देखभाल रखने और उनकी शिक्षा व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की सलाह दी।
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