अमर उजाला ब्यूरो
थर्मल। थर्मल प्लांट में क्लोरीन गैस के रिसाव के मामले में पांच सदस्यीय टीम मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारी यूनियन के लोगों का आरोप है कि अनट्रेंड लोगों से काम कराया जा रहा है। जिसके कारण हादसा हुआ।
उधर, पानीपत थर्मल पावर स्टेशन के क्लोरिनेशन प्लांट में गैस की चपेट में आने से बेहोश हुए नानक चन्द की हालत में सुधार है। उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इस बारे में कर्मचारी यूनियन ने ठेकेदार व थर्मल प्रशासन की लापरवाही बताकर मामले की उच्च स्तरीय कमेटी से जांच की मांग की। जिस पर चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन किया गया है।
पानीपत थर्मल पावर स्टेशन के क्लोरिनेशन प्लांट में सिलेंडर बदलते समय वाल्व में लीकेज हो गई और इसकी चपेट में आने से चार फायरकर्मी नानकचन्द, सुनील कुमार, नीरज रोहिला, खालिद व ठेकेदार का आदमी रमेश कुमार बेहोश हो गए थे। उसके बाद वहां मौजूद अधिकारियों ने सबसे बड़ी लापरवाही ये कर दी कि उस गैस से भरे सिलेंडर को पानी वाले प्लांट में डाल दिया। इसी कारण पानीपत थर्मल पावर स्टेशन से पानी की सप्लाई पूरी तरह सुबह ही शुरू हो सकी।
इस बारे में हरियाणा बिजली बोर्ड कर्मचारी परिषद के जिला महामंत्री जयबीर मान ने बताया कि अधिकारी व ठेकेदारों ने मिलकर अनट्रेंड कर्मचारी रखेे हुए हैं। क्लोरीन गैस लीकेज होने पर कर्मियों के पास बीए सेट यानी कि ऑक्सीजन के सिलेंडर सहित मास्क व सुरक्षा किट भी नहीं थी। यूनियन ने इस बारे में एचपीजीसीएल के डायरेक्टर को शिकायत कर दी है।
वर्जन--
इस बारे में थर्मल के चीफ सेफ्टी ऑफिसर सूरजभान ने बताया कि वो हादसे के समय प्लांट में नहीं थे। जांच कमेटी बना दी गई गई है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बयान..
इस बारे मे थर्मल के चीफ इंजीनियर सतीश कुमार वधवा ने बताया कि मामले की जांच को लेकर कमेटी बनाई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। अब पूरी स्थिति काबू में है।
फोटो संख्या-31
थर्मल प्लांट में अनट्रेंड कर्मचारी से काम कराने का आरोप, मामले की जांच के लिए कमेटी गठित, जांच रिपोर्ट पर होगी कार्रवाई
- थर्मल प्लांट में क्लोरीन गैस के लिकेज का मामला
- हादसे के समय मौजूद नहीं थे सेफ्टी अधिकारी, कर्मचारियों के पास नहीं थे सुरक्षा मानक पूरे
- पीड़ित लोग अस्पताल से घर पहुंचे