नपा चेयरमैन के खिलाफ शपथपत्र सौंपने वाले 13 पार्षद अज्ञातवास में गए
अमर उजाला ब्यूरो
समालखा। नगरपालिका के चेयरमैन अशोक कुच्छल के खिलाफ विधायक को शपथपत्र देने के बाद 13 पार्षद अज्ञातवास में चले गए हैं। सूत्रों की माने तो पार्षदों को टूटने से बचाने के लिए ये सब किया जा रहा है और 22 जून को ये सब डीसी चंद्रशेखर खरे से मिल सकते हैं। अज्ञातवास पर जाने से पहले शुक्रवार रात को इन्होंने एक भोजनालय पर पार्टी भी की है। वहीं मामला सामने आने के बाद चेयरमैन की बेचैनी बढ़ गई है।
पिछले कुछ महीनों से नगर पालिका समालखा में चेयरमैन व वाइस चेयरमैन को कुर्सी से हटाने को लेकर सुगबुगाहट जारी थी। जिसको लेकर एक गुट अंदरखाने प्रयास में लगा हुआ था। वेे ऐसे पार्षदों को अपनी तरफ कर रहा था जो चेयरमैन से असंतुष्ट चल रहे थे। इसी सिलसिले में कुल सत्रह पार्षदों में से शनिवार शाम को तेरह पार्षदों ने विधायक रविंद्र मच्छरौली से मिलक चेयरमैन पर अविश्वास जाहिर करते हुए शपथपत्र सौंप दिए। यहीं नहीं रात को भी शेष पार्षदों से शपथ पत्र देने को लेकर दूसरा गुट मुलाकात करता रहा है। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया है कि 22 जून को उक्त पार्षद डीसी से मिल सकते हैं। लेकिन डीसी के छुट्टी पर होने के कारण पार्षदों के पाला बदलने की संभावना को देखते हुए रविवार अलसुबह ही उन्हें घूमाने के नाम पर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है।
पार्षद बरेजा के हाथ से फिर फिसली कुर्सी
एक साल पहले नपा चुनाव के बाद वार्ड 11 से पार्षद श्याम बरेजा को चेयरमैन की कुर्सी मिलने के आसार बने थे। लेकिन राजनीतिक बिसात के खेल में कुच्छल व बैनीवाल ने उसे मात दे दी। ऐसा ही कुछ इस बार हुआ है। करीब दो-तीन महीनों से पार्षदों द्वारा चेयरमैन व वाइस चेयरमैन को हटाने की सुगबुगाहट चल रही थी। बरेेजा को वाइस चेयरमैन के पद का दावेदार माना जा रहा था। सूत्रों के अनुसार बनिया समाज से ही महिला पार्षद को चेयरमैन बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। जबकि वाइस चेयरमैन प्रवीन बैनीवाल ने विधायक के आशीर्वाद से अपनी कुर्सी बचा ली है और बरेजा के हाथ से नपा उपाध्यक्ष का पद फिर से फिसलता दिखाई दे रहा है।
13 पार्षदों का चाहिए कोरम
समालखा नगरपालिका में 17 पार्षद हैं तथा विधायक और सांसद भी नपा कमेटी के सदस्य माने जाते हैं और उनके भी एक-एक वोट है। इस तरह कुल 19 वोट में से अविश्वास प्रस्ताव के लिए 13 वोट प्राप्त करने होंगे। सूत्रों के अनुसार वर्तमान चेयरमैन अशोक कुच्छल को तीन अन्य पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। अगर कुच्छल भी किसी तरह से बागी पार्षदों में से तीन को अपने पाले में करने में सफल होते हैं तो बागियों की मंशा पर पानी फिर सकता। विधायक व सांसद के वोट भी इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।