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सीवर लाइन से नहीं जोड़े कॉलोनियों के नाले, बारिश में होगी आफत

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पानीपत। इस मानसून में भी पानीपत के लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ सकता है, क्योंकि जन स्वास्थ्य विभाग ने कॉलोनियों के नालों को सीवर लाइन से नहीं जोड़ा है। ऐसे में, नाले ओवरफ्लो होंगे और शहर में कई जगह जलभराव हो सकता है। कालोनियों में लोगों को अपने घरों में कैद होना पड़ सकता है और कई दिनों तक पानी जमा हुआ तो उनको बड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है। हालात ऐसे हैं कि प्री-मानसून की बौछारों के बाद नगर निगम, जन स्वास्थ्य विभाग और सिंचाई विभाग अब एक्शन मोड में आए हैं। इसके बाद नालों, सीवरेज, ड्रेनों की सफाई का काम शुरू किया गया है। मानसून लेट होने से जहां बगैर बारिश लोग गर्मी से परेशान हैं, वहीं विभागों के लिए यह देरी राहत जैसी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि तीन जुलाई से मानसून आएगा, इसके बावजूद अभी भी सफाई का काम पूरा नहीं हो सका है।
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प्री मानसून आने के बाद उतारे कर्मचारी, दिए ठेके
प्री-मानसून आने के बाद नगर निगम ने 6 नाला गैंग, जनस्वास्थ्य विभाग ने 6 लाख रुपये में ठेका दिया और सिंचाई विभाग ने भी कर्मचारी और 6 मशीन फील्ड में उतार दी। नगर निगम के एक सफाई गैंग के पास 13 कर्मचारी हैं। कर्मचारी शहर में स्थित 100 से अधिक नालों को साफ कर रहे हैं, जिसमें प्रतिमाह 15 लाख रुपये खर्च हो रहा है। वहीं जन स्वास्थ्य विभाग के पास 253 किलोमीटर लंबे सीवर हैं, जिनकी सफाई के लिए 36 कर्मचारी लगाए गए हैं। इन सीवर की सफाई के लिए 15 लाख रुपये माह का खर्च आ रहा है। वहीं सिंचाई विभाग के पास 48 ड्रेन हैं, प्रत्येक ड्रेन की सफाई के पांच लाख रुपये के हिसाब से ठेका दिया है। हर विभाग के पास नालों की क्षमता अलग-अलग है, लेकिन वह सभी मानसून मेें फेल होती नजर आ रही हैं। मानसून से पहले सफाई में विभागों को करीब दो माह का समय लगता है, लेकिन इन विभागों ने अब सफाई शुरू की है तो लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
नगर निगम में 250 मीटर लंबे नालों के लिए हर माह लगता है 15 लाख रुपये : नगर निगम कर्मचारी ने बताया कि नाला गैंग को सफाई करने के लिए हर माह 15 लाख रुपये दिए जाते हैं। इन नालों की लंबाई लगभग 250 किलोमीटर है। इनको साफ करने के लिए नगर निगम कमिश्नर ने उन्हें सख्त आदेश दिए हैं कि वह मानसून से पहले पूरे शहर के नालों की सफाई को पूरा करें। उन्होंने कहा कि वह कभी दौरा कर व्यवस्था का जायजा ले सकती है।
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जन स्वास्थ्य विभाग के पास 253 किलोमीटर सीवर में 45 एमएलडी की क्षमता : शहर में चल रहे 253 किलोमीटर सीवरेज की क्षमता 45 एमएलडी है। शहर के पानी को डिस्पोज करने के लिए विभाग ने चार डिस्पोजल बनाए हैं, जो कि ओल्ड हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, उद् रोड, देवी मंदिर और विवर्स कॉलोनी में बनाए गए हैं। एसडीओ ने बताया कि शहर भर में एक करोड़ 16 लाख रुपये का खर्च आता है। अभी उन्होंने सफाई के लिए 36 कर्मचारी लगाए हुए हैं, जो शहर की सफाई कर रहे हैं।
सिंचाई विभाग नहीं सतर्क, लापरवाही से कर रहा काम : शहरवासियों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने प्री मानसून के बाद काम शुरू किया है। अगर मानसून जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होता है तो शहर को मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि विभाग की अभी सफाई शुरू हुई है, जिसे पूरा होने में कम से कम दो माह का समय लगेगा। पार्षदों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने देरी से काम शुरू किया है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ सकता है।
शहर में 24 छोटी व 24 ड्रेन है बड़ी : शहर में 24 छोटी व 24 ड्रेन बड़ी है। पिछले मानसून में यह सभी ओवरफ्लो थी, जिसके कारण समस्या हुई थी। वहीं लापरवाही विभाग ने दोबारा से कर दी है। एक ड्रेन की क्षमता 3200 क्यूरिक है। हर छोटी-बड़ी ड्रेन की अपनी अलग अलग क्षमता है। मानसून से पहले ही ड्रेन में पानी की क्षमता अधिक हो चुकी है, जिसके कारण शहर वासियों से अपील है कि वह पानी को व्यर्थ न बहाएं। इसका फायदा उन्हें मानसून के वक्त मिल सकता है।
इन जगहों पर भरता है हर साल पानी : इंसार बाजार, चौड़ा बाजार, पालिका बाजार, जीटी रोड, संजय चौक, राजीव कॉलोनी, कप्तान कॉलोनी, वीरभवन चौक, सनौली रोड, सेक्टर 25 पार्ट वन एवं पार्ट टू, सेक्टर 29 पार्ट वन एवं टू, नूरवाला, विद्यानंद कॉलोनी, बलजीत नगर, कच्चा कैंप आदि जगहों पर बरसात के समय नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं, जिसके कारण शहर को सामान्य होने में दो से तीन हफ्ते लग जाते हैं।
सफाई के लिए 54 लाख रुपये का बजट, अब तक खर्च हुआ 26 लाख रुपये : शहर की सफाई के लिए विभागों के पास अलग-अलग बजट आया है। तीनों विभागों को मिलाकर 54 लाख रुपये का बजट आया है। इसमें से अभी तक लगभग 26 लाख रुपये खर्च हो गया है। एक माह में विभागों के पास 27 लाख रुपये का बजट आता है, लेकिन मानसून में सफाई के लिए उनके पास दो माह का बजट दिया जाता है, ताकि उन्हें कोई काम प्रभावित ना हो।
शहर के नालों को सीवर लाइन से जोड़ना कारपोरेशन का काम है, उनकी तरफ से सीवर की सफाई चल रही है। जल्द ही शहर को स्वच्छ बनाया जाएगा।
- विकास, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग, पानीपत
शहर में चल रही ड्रेन की सफाई करने के लिए कर्मचारियों ने मोर्चा संभाल लिया है। इसमें सफाई करने के लिए पांच से छह लाख रुपये का खर्च आता है। हर साल की तरह वह इस बार भी मानसून से पहले ड्रेन को साफ करवा देंगे, ताकि शहर वासियों को किसी भी परेशानी का सामना ना करना पड़े।
-सुरेश सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, पानीपत
शहर में नाले नालियों की सफाई के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा गया है। शहर में नालों की सफाई के लिए काम शुरू करवा दिया है, जल्द ही शहर के नालों को पूरी तरह से स्वच्छ किया जाएगा।
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- अवनीत कौर, मेयर नगर निगम, पानीपत
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