सनौली। सरकार की ओर से अलॉट गांवों में खेल नर्सरी में सुविधाएं नहीं मिलने से महिला खिलाड़ी अपने दम पर आगे बढ़ रहीं हैं। गांव जलालपुर प्रथम में नेशनल वॉलीबाल खेल में चार लड़कियों ने गोल्ड मेडल जीता, लेकिन आगे बढ़ने के लिए उन्हें खेल नर्सियों में कोच की सुविधाएं नहीं मिलीं। यह लड़कियां पीछे नहीं हटी, हार नहीं मानी और आसपास के चार गांवों की लड़कियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरीं। चारों नेशनल खिलाड़ी अब आसपास के गांवों से 40 लड़कियों को वॉलीबाल व एथलेटिक्स में दमखम दिखाने के लिए घरों से निकालकर खेल के मैदान तक लाई हैैं। इनमें से 15 खिलाड़ी जूनियर टीम में राज्य एवं नेशनल स्तर की वॉलीबाल टीम का हिस्सा बन गई हैं।
यह हालात तब है कि जबकि दो वर्ष पहले सरकार की ओर से अलॉट की गईं खेल नर्सियों में अब तक सुविधाएं नहीं दी गई हैं। दो वर्ष पहले नव ज्योति मॉडल स्कूल जलालपुर प्रथम में लड़कियों के लिए वॉलीबाल की खेल नर्सरी अलॉट की गई थी, लेकिन यहां न वॉलीबाल है, न नेट है और न ही कोई कोच। इतना ही नहीं सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता भी नहीं दी गई। जबकि इस स्कूल की लड़कियां नेशनल स्तर पर अंडर-14 और 17 आयु वर्ग में गोल्ड मेडल जीत कर अपने गांव, जिले और प्र देश का नाम रोशन कर चुकीं हैं ।
बोली खिलाड़ी : खिलाड़ी अन्नू ने बताया कि उन्होंने स्कूल के कोच की मदद से गांव में स्थित नव ज्योति मॉडल स्कूल में खेलों का अभ्यास कर जिला, स्टेट व नेशनल स्तर पर वॉलीबाल में गोल्ड जीता। अब सरकार द्वारा दो वर्ष पूर्व लड़कियों की खेल नर्सरी अलॉट की गई थी मगर अब तक सरकार की ओर से इसमें वॉलीबाल, नेट, पोल आदि कोई अन्य सुविधाएं नही दी गई, लेकिन हमने आगे बढ़ने की ठान रखी थी। स्कूल मैदान में खुद प्रैक्टिस करने के साथ ही गांव की अन्य लड़कियों को भी साथ खिलाती हैं। जिससे अनेक लड़कियां अब घरों से निकल कर मैदान में आ चुकी हैं और राज्य व नेशनल स्तर कि खिलाड़ी बनी है।
खिलाड़ी पारुल ने बताया कि गांव से स्कूल में वॉलीबाल खेल सीखने आ रही हैं। उन्हें सरकार की ओर से खेल सामग्री नहीं दी गई। लड़कियों ने आपस में पैसे इकट्ठे करके वॉलीबाल, नेट खरीद कर स्कूल के कोच के साथ ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। सरकार उन्हें खेलों की सुविधाएं दे तो लड़कियों खेलों को ओर आगे बढ़ सकती हैं। अब वे गांव की अन्य लड़कियों को अपने साथ-साथ खिलाने के लिए ला रही हैं।
नेशनल खिलाड़ी शिवानी का कहना है कि पहले तो उन्होंने अपने परिवार को खेलने के लिए तैयार किया और उन्होंने खेलों में आगे आने के लिए गांव से बाहर निकल कर खेल के मैदान में खेल सीखने आई हैं मगर अब सरकार की ओर से लड़कियों के लिए अलॉट की गई नर्सरी में सरकार कोई सुविधाएं नही दी गई। अब वे अपने पैसे लगाकर सीख रहीं हैं। हमारी मेहनत व लगन को देख कर अन्य लड़कियां भी उनके साथ जुड़ रहीं हैं।
नेशनल खिलाड़ी कृति, अदिति, माफी उझा का कहना है कि वे आसपास के गांवों से कई वर्षों से वॉलीबाल सीखने आती हैं। स्कूल की ओर से उनके कोच ईसम सिंह फौजी, बिजेंद्र रावल हैं, वे लड़कियों को वॉलीबाल, कबड्डी, दौड़ कराते हैं। उनकी बदौलत दो बार लड़कियों की टीम जिला, राज्य व नेशनल स्तर कर गोल्ड मेडल जीत कर लाई हैं। अब सरकार ने स्कूल में लड़कियों के लिए खेल नर्सरी अलॉट की गई हैं, मगर दो वर्ष बीत जाने पर उन्हें कोई सुविधाएं नही दी गई हैं। ऐसे में लड़कियों कैसे खेलों में आगे बढ़ेंगी।
बोले स्कूल संचालक : नव ज्योति मॉडल स्कूल संचालक राजेश शर्मा ने बताया कि स्कूल में आसपास के 6 गांवों से लड़कियां खेलने आती हैं, उन्हें स्कूल की ओर से कोच खेल सिखाते हैं। जिससे दो बार लड़कियां वॉलीबाल में नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीत कर लाई हैं। चार लड़कियां नेशनल वॉलीबाल टीम में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। उन्हें खेलते देख अब आसपास के गांव रिशपूर, नन्हेड़ा, सनौली, उझा आदि से 40 लड़कियां खेलने आ रही हैं ।
बोले जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के सीनियर कोच : जिला खेल अधिकारी विभाग के सीनियर कोच राजेंद पाल का कहना है कि अभी नर्सरी में पोल व बाल भेजी गई है। अन्य मेंटेनेंस आदि की सुविधाएं दी जाएगी। इस वर्ष विभाग के पास पैसा नहीं आया हैं । जल्दी ही विभाग में पैसा आने पर सभी सुविधाएं दी जाएंगी। जल्द ही खेल नर्सरी में सभी सुविधाएं शुरू की जाएंगी ।