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एनएमसी के विरोध में निजी अस्पतालों में नहीं हुई ओपीडी
-सात हजार मरीजों को खाने पड़े धक्के, सिविल अस्पताल में भी सभी को नहीं मिला इलाज
-मरीज बोले: डॉक्टर तो भगवान होते है कैसे मरीजों को उनके हाल पर छोड़ गए
-आईएमए बोली: सरकार एनएमसी लाकर डॉक्टरों के हितों का कर रही है हनन, किसी भी सूरत में एनएमसी पास नहीं होने देंगे
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) के खिलाफ संघर्ष कर रहे निजी डॉक्टर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शनिवार को निजी डॉक्टर सड़क पर उतर आए। इससे पहले आईएमए ने निजी होटल में मीटिंग की और सरकार के खिलाफ गरजे। डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। इसके बाद आईएमए ने डीडीपीओ उपेंद्र मलिक के माध्यम से सीएम मनोहर लाल खट्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। हड़ताल के कारण शनिवार को जिले के 150 निजी अस्पतालों में ओपीडी नहीं हुई। ऐसे में सात हजार मरीजों को भटकना पड़ा।
आईएमए के जिला प्रधान डॉ. गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार डॉक्टरों के हितों का हनन कर रही है। सरकार जबरदस्ती उन पर नेशनल मेडिकल काउंसिल थोप रही है।एनएमसी पूर्ण रूप से डॉक्टरों के विरोध में है। वो कई साल से सरकार से मांग कर रहे हैं कि एनएमसी को या तो भंग किया जाए या इसमें डॉक्टरों को शामिल किया जाए। सरकार एनएमसी में राजनेताओं, आईएएस ऑफिसरों व अन्य लोगों को शामिल कर रही है। जोकि डॉक्टरों के हितों का ख्याल नहीं रख सकते। यदि सरकार ने एनएमसी को रद्द नहीं किया तो डॉक्टर बड़ा आंदोलन करेंगे और इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
निजी अस्पतालों में होती है हर रोज सात हजार ओपीडी
जिले के 150 निजी अस्पतालों में हर रोज सात हजार ओपीडी होती है। शनिवार को निजी डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सात हजार मरीजों को धक्के खाने पड़े। भीड़ अधिक होने के कारण काफी मरीजों को सिविल अस्पताल में भी इलाज नहीं मिल पाया। मरीज बिना इलाज ही घर लौट गए।
सरकार सतर्क क्यों नहीं होती
निजी डॉक्टरों ने पहले ही हड़ताल का ऐलान कर दिया था तो सरकार की जिम्मेदारी बनती थी कि कोई प्रबंध करें। मैं भी छाती में दर्द के कारण निजी अस्पताल में गया था, लेकिन ओपीडी बंद होने के उसको सिविल अस्पताल में आना पड़ा। यहां मरीजों की बहुत अधिक भीड़ है। दो घंटे में उसका नंबर आया। यहां भी व्यवस्था बद से बदतर है। सरकार को स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त करना चाहिए।
- राघव कुमार, शहरवासी
माइग्रेन के इलाज के लिए आया था
निजी अस्पतालों में हड़ताल थी। कई अस्पतालों में गया, लेकिन कहीं भी ओपीडी नहीं हो रही थी। वह काफी दिनों से माइग्रेन की समस्या के कारण परेशान है। वह इलाज के लिए सिविल अस्पताल में आया तो पता चला कि यहां तो फीजिशियन ही नहीं है। दूसरे डॉक्टरों ने दवा दी है। मरीजों को हड़ताल के कारण काफी धक्के खाने पड़ रहे हैं। -संदीप कुमार, शहरवासी
डॉक्टरों को भगवान कहते हैं, प्रतिष्ठा बचाए रखना जरूरी
शनिवार को सभी निजी डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस कारण शहर के मरीज इलाज के लिए इधर से उधर भटकते रहे। डॉक्टरों को मरीजों के बारे में सोचना चाहिए। डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप कहते हैं तो डॉक्टरों को अपनी प्रतिष्ठा बचाए रखनी चाहिए।
- नरेंद्र वधवा, शहरवासी
सिविल अस्पताल में हुई 880 ओपीडी
निजी अस्पतालों में हड़ताल के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल के कारण काफी मरीज घर लौट गए तो काफी सिविल अस्पताल पहुंच गए। दूसरे दिन से शनिवार को 200-250 ओपीडी अधिक हुई, यहां से 200 से अधिक मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा, क्योंकि डॉक्टरों की संख्या काफी कम है इसलिए वे भी दो बजे तक सभी मरीजों की जांच नहीं कर पाए।