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-आशा वर्कर अपनी मांगों को लेकर लघु सचिवालय पर किया प्रदर्शन

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आशा वर्करों ने चम्मच-कटोरी लेकर किया प्रदर्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। आशा वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर रविवार को पल्स पोलियो अभियान का बहिष्कार कर चम्मच व कटोरी हाथ में लेकर प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय के बाहर जीटी रोड पर समालखा विधायक का पुतला फूंका। स्वास्थ्य विभाग अभियान मात्र 41 प्रतिशत ही पूरा हो सका। विभाग केवल बूथों पर ही बच्चों को पिला पाया। आशा वर्कर्स यूनियन ने इसको सरकार की अनदेखी करार दिया है।
आशा वर्कर्स एसोसिएशन ने रविवार को लघु सचिवालय के बाहर समालखा विधायक रविंद्र मच्छरौली का पुतला फूंककर रोष प्रकट किया। आशा वर्कर इससे पहले गीता कॉलोनी स्थित सीटू कार्यालय पर एकजुट हुई। वर्कर हाथ में चम्मच व कटोरी लेकर जीटी रोड से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय के बाहर पहुंचीं। इस दौरान जीटी रोड का यातायात बाधित रहा। आशा वर्करों ने बीच जीटी रोड में पुतला फूंकने से करीब दस मिनट तक जीटी रोड की दिल्ली-करनाल लेन बंद रही। यूनियन की पूर्व राज्य प्रधान सुमन शर्मा ने कहा कि आशा वर्कर स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को धरातल पर लेकर जाती हैं और उनके प्रयासों से भ्रूण हत्या में कमी आई है और प्रदेश में लड़कियों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली व गुजरात सरकार आशा वर्करों को 45 सौ रुपये मानदेय दे रही है, जबकि तेलंगाना सरकार छह हजार व केरल में 75 सौ रुपये दिया जा रहा है। जबकि प्रदेश में मात्र एक हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है। ऐसे में आशा वर्कर अपने परिवार तक को नहीं संभाल सकती। सीटू के जिला प्रधान सुनील दत्त व सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान कश्मीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की अनदेखी से कर्मचारियों व वर्करों में रोष व्याप्त है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर कर्मचारी 30 जनवरी को पानीपत समेत प्रदेश में सामूहिक गिरफ्तारी देंगे। इस मौके पर प्रधान जयभगवान, उप प्रधान गुलाब, सुरेंद्र नरवाल, नवीन सपड़ा मौजूद रहे।
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स्वास्थ्य विभाग को लगा झटका
आशा वर्करों के पल्स पोलियो अभियान का बहिष्कार करने पर स्वास्थ्य विभाग को झटका लगा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार तीन दिवसीय अभियान के अंतर्गत 2.24 लाख बच्चों को दवा पिलाई जानी थी, लेकिन जिले में मात्र 84,500 बच्चों को ही दवा पिलाई जा सकी। जिले में आशा वर्करों की मदद के बिना 727 बूथ ही लगाए जा सके। इन पर 24 डॉक्टर तैनात रहे। वहीं विभाग द्वारा स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट व क्लर्क स्टाफ की मदद ली गई। बावजूद इसके बाद भी टारगेट पूरे नहीं कर पाया।
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