टूटने की कगार पर हुडा, अधिकारियों को नए सेक्टरों के आने का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। हरियाणा अर्बन डेवलेपमेंट अथॉरिटी के आमदनी के संसाधन नगर निगम को देने के बाद अब यह टूटने के कगार पर पहुंच गया है। अधिकारियों को हुडा में नए सेक्टर आने का इंतजार है। अधिकारियों का मानना है कि नए सेक्टर आने पर हुडा अपने अस्तित्व में रह सकता है। हालांकि हुडा कर्मचारी यूनियन ने पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके चलते स्टाफ को वापस लाया गया था, लेकिन अब भी पानी व सीवर की अर्निंग नगर निगम के पास जा रही है।
पानीपत जिले में साइटों की अधिक कीमतों के कारण खरीदारों में भी 50 प्रतिशत तक कमी आई है। जिसका असर हुडा की अर्निंग पर पड़ा है। वहीं ईओ के पास साइट की 20 प्रतिशत तक के रेट कम करने की पावर थी, वो भी कम करके दस प्रतिशत कर दी गई। ऑनलाइन बोली भी अर्निंग में कुछ हद तक बाधा बन कर सामने आई है। जिससे साइट के मिनिमम प्राइज भी अधिक हो गए है। लेकिन हुडा के कार्य में पारदर्शिता आई है। ऑनलाइन बोली होने से बीच में पैसे खाने वाले ब्रोकर काफी हद तक कम हो गए हैं।
सरकार की ऐसी ही पॉलिसी
अधिकारियों के अनुसार सरकार की पॉलिसी के अनुसार डीटीपी एक सेक्टर तैयार करेगा। उसका कार्यभार हुडा को देगा। सेक्टर जब तक पूरी तरह से पानी, सीवर, सड़क व अन्य जरूरतों की तरफ से परिपूर्ण नहीं हो जाता है, तब तक उसका रखरखाव व उसमें होने वाले अवैध निर्माण को हुडा व डीटीपी देखेगा। जब सेक्टर पूरी तरह से विकसित हो जाता है तो ऑटोमेटिक ही वह सेक्टर नगर निगम को ट्रांसफर कर दिया जाता है।
हुडा के पास पैसे की बड़ी भारी कमी
हुडा अधिकारियों ने बताया कि कोई भी नेता या मंत्री सेक्टरों की मेंटेनेंस के लिए बजट देने की बात कह देता है। लेकिन हकीकत यह है कि हुडा के पास अब पैसे की बड़ी भारी कमी है। जिस कारण से हुडा के सेक्टरों में होने वाले विकास कार्य भी धीमी गति से चल रहे हैं या फिर ठप पड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार ठेकेदार की भी एक लिमिट होती है। जब तक विभाग काम करने के लिए ठेकेदार को पैसा नहीं देगा तो विकास नहीं हो पाएगा।
अब शहरों से लेकर गांवों तक सेक्टर बनाने के प्लान हो रहे हैं तैयार
अब शहरों से लेकर गांवों तक सेक्टर बनाने के मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। कुछ नए सेक्टरों का डीटीपी विभाग प्लान कर रहा है तो कुछ नए सेक्टर का प्लान तैयार कर रोहतक हुडा विभाग के पास भेजे जा चुके हैं। जो पास होकर चंडीगढ़ ऑफिस में चले गए हैं। लेकिन भेजे गए सेक्टरों का कुछ पता नहीं चल पा रहा है कि उनका क्या होगा।
जिले में नए सेक्टर विकसित होते हैं तो हुडा खड़ा रह सकता है। लेकिन नए सेक्टर विकसित नहीं हो पा रहे हैं। न ही बाकी सेक्टरों की साइटों की बिक्री हो पा रही है। यह सब चिंता का विषय है।
दीपक घनघस, ईओ, हुडा पानीपत।