फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

-पांच सौ साल के इतिहास में पहला गुरुद्वारा गिरा

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

पानीपत। जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा पहली पातशाही का दो मंजिला भवन और गुबंद पांच मिनट में ही गिर गया। कुछ लोग गुरुद्वारे के भवन के ढहने का कारण जमीन धंसना बता रहे हैं, तो कुछ लोग लेंटर के नीचे स्पॉट ठीक से न लगाना बता रहे हैं। पांच साल साल के इतिहास में गुरुद्वारा गिरने की पहली घटना है। हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि दो सेवादार व एक राहगीर समेत नौ लोग घायल हो गए। दो सेवादारों और तीन श्रमिकों के अंदर की दबा होने की आशंका है। हादसे के बाद जीटी रोड पूरी तरह से बंद कर दिया गया। पानीपत से आने-जाने वाले वाहनों को एलिवेटिड हाईवे और दूसरे मार्गों से डायवर्ट कर दिया गया। चार दबे लोगों को बचाने के लिए रातभर बचाव कार्य चलता रहा। एनडीआरएफ की रेसक्यू टीम भी देर रात को बचाव के लिए पहुंच गई।
भवन के पिछले हिस्से में कुछ श्रमिक और सेवादार सोमवार को काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी समय अंदर से स्पॉट ढीली हो गई और जैक हिलने से पूरे भवन का वजन नीचे आ गया। इससे दो मंजिला भवन और गुंबद गिर गया। गुरुद्वारे का ऊपरी हिस्सा बाजार ही तरफ आ गिरा। इससे एक दुकान पर काम करने वाला राम शर्मा घायल हो गया। उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि राम शर्मा सिर और कमर में मलबा लगने से घायल हुआ है।
विज्ञापन

दो सेेवादार और तीन श्रमिकों को बचाने के लिए रातभर लगे रहे
सिख समुदाय के लोगों ने सरकारी तंत्र की मदद से शाम करीब सात बजे तक भवन में मलबे से एक महिला और दो बच्चों समेत नौ लोगों को तो बाहर निकाल दिया था। इनमें से एक श्रमिक धीरज (40) छेलिया सीतापुर यूपी को मौत हो गई। बाकी घायलों को विभिन्न अस्पतालों में दाखिल कराया गया। इसके बाद मलबे में दबे सेवादार दवींद्र सिंह, दर्शन और मजदूर बादशाह, नीरज और नन्हा को बचाने के लिए अभियान देर रात तक चलता रहा। रिफाइनरी का विशेष दल भी बचाव कार्य में लगा रहा। देर रात तक पांचों से किसी को भी निकाला नहीं जा सका था। बताया जा रहा है कि सब मजदूर उझा रोड पर रहते थे। सोमवार रात करीब दस बजे एनडीआरएफ इंडिया की रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंच गई।
मलबे में दबे सेवादार ने किया फोन
बताया जा रहा है कि रात करीब सवा दस बजे मलबे में दबे एक सेवादार ने मोबाइल पर फोन कर सबके सुरक्षित होने की बात कही है। उसने बताया कि उनको हल्की चोट लगी हुई है।
गुरु ग्रंथ साहिब को सम्मानपूर्वक दूसरे भवन में ले जाया गया
गुरुद्वारा पहली पातशाही के धंसते ही समुदाय के लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित निकाला और सम्मानपूर्वक गुरुद्वारा जीटी रोड के दूसरी तरफ स्थित दूसरे भवन में ले जाया गया। समुदाय के लोगों ने अपने स्तर पर राहत कार्य किया और आसपास के लोगों से शांति बनाए रखने की विनती भी बार-बार करते रहे। गुरु ग्रंथ साहिब को सम्मानपूर्वक सुरक्षित ले जाने के बाद बचाव कार्य तेज किया।
बाजार में अफरा-तफरी मची, पूरा शहर जाम
गुरुद्वारा पहली पातशाही का दो मंजिला भवन और गुंबद गिरते ही गुरुद्वारा मार्केट, चौड़ा बाजार में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि गुरुद्वारा गिरने से इसके साथ लगती गुरुद्वारा की सात-आठ दुकान भी गिर गईं। चार बाइक मलबे के नीचे दबने से टूट र्गइं। ट्रैफिक संभालने के लिए शहर के थानों और चौकी के साथ ही समालखा से भी कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बुला लिया गया। करनाल एसपी, असंध डीएसपी दलबीर सिंह और करनाल पुलिस के इंस्पेक्टर जसपाल सिंह ढिल्लो भी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए।
सिख और दूसरे संगठनों के लोग पहुंचे
सिख समुदाय के लोग और दूसरे संगठनों के पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए। कुछ ही देर में पानी की सेवा शुरू हो गई और लोग रातभर अधिकारियों और दूसरे लोगों की पानी की सेवा करते रहे। पुलिस के आला अधिकारी बाजार के अंदर और दूसरे स्थानों पर एनाउंसमेंट कर राहत कार्य के आसपास न जाने की अपील करते रहे।

मैं गुरुद्वारा मार्केट स्थित नौ नंबर दुकान पर बैठा था। सोमवार दोपहर बाद करीब चार बजे बिजली का फाल्टा हुआ। धमाके के साथ दुकानों के मीटर फुंक गए। मैं और बाकी दुकानदार बाहर निकल आए और बिजली कर्मियों को सूचना दी। मैं इसके बाद दुकान में अंदर चला गया। करीब साढ़े चार बजे गुंबद से स्टील का एक पिलर नीचे गिरा। मैं बाहर आकर देखने लगा। इसी समय गुरुद्वारे का काफी हिस्सा धंसता चला गया और गुरुद्वारे की दीवार हिल गई। मैं शटर खोलकर बाहर आ गया।
(जैसा कि वर्धमान कंबल भंडार के संचालक सोनू जैन ने अमर उजाला को बताया। )

मैं सोमवार दोपहर बाद से गुरुद्वारे में था और करीब सवा चार बजे लंगर सेवा कर रहा था। गुरुद्वारे के पुराने भवन में अंदर निर्माण कार्य चल रह था। कुछ यात्री आराम करने आए हुए थे। इसी समय गुरुद्वारे के गुंबद से कुछ हिला। मैं कुछ संभला और एक तरफ होने लगा। इसी बीच छत से कुछ गिरकर मेेरी कमर व अन्य जगह लगा। मुझे कई जगह चोट आई। गुरुद्वारे के अंदर मलबा गिरने से कई लोग नीचे दब गए। मैंने एक बार तो आगे जाने का प्रयास किया, लेकिन मैं साहस नहीं जुटा पाया। इसी समय आसपास के लोग भी गुरुद्वारे में बचाव कार्य को पहुंच गए।
(जैसा की घायल हरसिमरण सिंह ने अमर उजाला को बताया।)

आईओसीएल का विशेष दस्ता शाम को पहुंचा, आते ही गाड़ी खराब हुई
आईओसीएल का एक बड़ा दस्ता बचाव कार्य के लिए शाम करीब 6:21 बजे पहुंचा। आपातकाल गाड़ी गुरुद्वारे के सामने आते ही खराब हो गई। ऐसे में एंबुलेंस निकलने का रास्ता नहीं मिला। लोगों ने धक्का लगाकर गाड़ी को आगे किया। इसके बाद ही रास्ता मिल सका।
गुरुद्वारे के पुराने भवन को दिया जाना था नया रूप
बताया जा रहा कि गुरुद्वारा पहली पातशाही का भवन करोड़ों रुपये का है। इसके पुराने भवन को नया रूप दिया जा रहा था। इसके लिए आधुनिक टेकभनोलॉजी इस्तेमाल की जा रही थी। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों ही गुरुद्वारा भवन से पालकी साहब को दूसरे भवन में ले जाया गया था। दीवारों पर नया पत्थर लगाने के साथ फॉल सिलिंग का काम चल रहा था। यहां पर करीब 20 प्रतिशत ही काम पूरा हो पाया था। बताया जा रहा है कि भवन के नीचे लंगर घर है। कुछ लोग इसका कारण भवन या आसपास की पाइप लीक होना भी मान रहे हैं।
कोट्स फोटो
जिंदगी बचाने को हर रोज भागते हैं, पहली बार जिंदगी मन को शांति मिली
एंबुलेंस चालक उमेद सिंह निवासी सिवाह ने बताया कि वह गुरुद्वारा गिरने की सूचना मिलते ही एंबुलेंस लेकर तुरंत पहुंचा। वह लोगों की जान बचाने को हर रोज भागता हूं, लेकिन धर्म के स्थान पर राहत कार्य में अपना सहयोग देकर मुझे शांति मिली है। घायल पंकज को जैसे ही गुरुद्वारे के भवन से बाहर लाया गया। मैं उसको अपनी एंबुलेंस में लेकर तुरंत सिवाह स्थित पार्क अस्पताल में पहुंचा। वहां पर उसको आईसीयू में दाखिल कराया और एंबुलेंस लेकर तुरंत गुरुद्वारे पर पहुंच गया।
विज्ञापन


सायरन की आवाज से भी हिलने लगा भवन
जीटी रोड पर स्थित पहली पातशाही का कुछ हिस्सा गिरते ही बाकी भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस और दूसरी गाड़ियों के सायरन बजने पर भी भवन हिलने लगा था। गुरुद्वारे में बचाव कार्य में लगे लोगों को इन सबके चलते भी खतरा हो रहा था। एंबुुलेंस व दूसरी गाड़ियों के बार-बार बजने वाले सायरनों को बंद करवाया जा रहा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें