1 लाख 41 हजार प्रॉपर्टी मालिकों में से महज 4 हजार 23 लोगों ने ही कराया प्रॉपर्टी टैक्स जमा, कई सालों से 187.45 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स बकाया, अब निगम दोबारा कराएगा सर्वे
पानीपत। नगर निगम को आर्थिक चूना लगाने वालों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राथमिक कार्रवाई में नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने वाले 105 लोगों को डिफाल्टर घोषित कर नोटिस जारी किया है। इन 105 डिफाल्टरों को 11 करोड़ के नोटिस दिए गए हैं। शहर में कुल 1 लाख 41 हजार प्रॉपर्टी मालिक नगर निगम के रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड हैं। ये सर्वे कई साल पहले हुआ था। इनमें से महज 4 हजार 23 लोगों ने ही प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराया है। कई सालों से नगर निगम का 187.45 करोड़ रुपये बकाया पड़ा है। अब नगर निगम डिफाल्टरों की लिस्ट बनाकर नोटिस दे रहा है। अब निगम एक निजी एजेंसी से दोबारा सर्वे भी कराएगा।
2018-19 सत्र में अब तक शहर में प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में 31.05 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि 160.15 करोड़ रुपये कई सालों से पेंडिंग पड़ा हुआ है। नगर निगम ने इसे वसूलने के लिए कभी कड़े प्रयास नहीं किए। कई सालों से नया सर्वे भी नहीं हुआ है। 191 करोड़ में से अब तक 3.74 करोड़ रुपये ही जमा हुए हैं। ही नगर निगम में जमा हुए हैं। नगर निगम के रिकार्ड में 1 लाख 41 हजार 3 यूनिट रजिस्टर्ड हैं। इनमें 42 हजार 830 आवासीय मकान, 11 हजार 819 कर्मिशयल, 3392 औद्योगिक, 29 हजार 842 खाली प्लॉट व 50 हजार 513 ऐसी यूनिट है जो कर्मिशयल व रिहायशी दोनों हैं। 1359 स्पेशल कैटेगरी में रजिस्टर्ड हैं। अब दोबारा फ्रैश सर्वे के बाद इनकी संख्या काफी अधिक बढ़ सकती है। नगर निगम ने डिफाल्टरों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर निगम कमिश्नर प्रियंका सोनी ने पानीपत में ज्वाइन करते ही डिफाल्टरों की सूची जारी कर नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। प्राथमिक चरण में 105 लोगों को नोटिस भेजा गया है। इन लोगों को 11 करोड़ के नोटिस दिए गए हैं।
नगर निगम नहीं भेजता प्रॉपर्टी टैक्स बिल:
नगर निगम की लचर प्रणाली के कारण ही अब तक नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। समय पर लोगों के पास प्रॉपर्टी टैक्स बिल नहीं पहुंचते। निगम 1-1 साल के एक साथ बिल भेज देता है। जिस कारण लोग इतना टैक्स भरने में असमर्थ हो जाते हैं। इस कारण भी निगम का करोड़ों रुपया बकाया पड़ा है।
प्राइवेट स्कूल व प्राइवेट अस्पताल नहीं देते प्रॉपर्टी टैक्स:
नगर निगम का सबसे अधिक पैसा प्राइवेट स्कूल व प्राइवेट अस्पतालों के पास बकाया पड़ा है। बताया जा रहा है कि इनमें नगर निगम का करोड़ों रुपया प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में बकाया पड़ा है।
अब दोबारा सर्वे कराएंगे:
नगर निगम ने दोबारा किसी निजी एजेंसी से सर्वे कराने का फैसला लिया है। कई सालों से सर्वे नहीं हुआ है। अब दोबारा सर्वे होने के कारण प्रॉपर्टी मालिकों की संख्या काफी बढ़ सकती है।
प्राथमिक कार्रवाई में 105 को दिए हैं नोटिस, कार्रवाई जारी रहेगी: सोनी
नगर निगम ने डिफाल्टरों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राथमिक कार्रवाई में 105 लोगों को 11 करोड़ के नोटिस दिए गए हैं। अब दोबारा सर्वे भी कराया जाएगा। जिन लोगों ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं कराया है उन पर कार्रवाई करेंगे।
प्रियंका सोनी, निगमायुक्त पानीपत।
नगर निगम को साढे 22 करोड़ खर्च करने की मिली मंजूरी, लेकिन पार्कों की मरम्मत के नहीं बनेंगे एस्टीमेट
पानीपत। नगर निगम का उन साढ़े 22 करोड़ रुपये को विकास कार्यों पर खर्च करने की मंजूरी मिल गई है। जिनके नगर निगम अधिकारियों ने पार्कों की मरम्मत करने के एस्टीमेट तैयार कर दिए थे। लेकिन नगर निगम पार्कों की मरम्मत पर उन पैसों को खर्च नहीं कर सकता। क्योंकि सीएम मनोहर लाल ने पार्क मरम्मत के एस्टीमेट मामले की जांच कराने के निर्देश दे रखे हैं। तकनीकी सलाहकार उनकी जांच कर रहे हैं। इसलिए वो एस्टीमेट रद्द हो चुके हैं। नगर निगम अधिकारियों ने इनके लिए अलग अलग प्रकार के विकास कार्यों के एस्टीमेट बनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इनमें गलियां पक्की कराना, गंदे पानी की निकासी, पेयजल सुविधा समेत विकास कार्य आते हैं। अब नगर निगम इन साढ़े 22 करोड़ के फ्रैश एस्टीमेट बना रहा है।
गौरतलब है कि सीएम मनोहर लाल ने 2015 में कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि खरीदने के लिए पानीपत नगर निगम को साढ़े 22 करोड़ रुपए दिए थे। इस साल सितंबर में नगर निगम के आयुक्त रहे प्रदीप डागर ने इन पैसों को पार्कों की मरम्मत पर खर्च करने के लिए एस्टीमेट तैयार कर दिए थे। लेकिन एस्टीमेट में भारी गड़बड़ की गई थी। जिन पार्कों की मरम्मत 10 लाख रुपए में हो सकती है उनके करोड़ों रुपये के एस्टीमेट बना दिए गए थे। काफी पार्कों में पहले से विकास कार्य चल रहे थे। इस पूरे मामले की शिकायत भाजपा नेता दुष्यंत भट्ट सीएम को की थी। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों पर घोटाला करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद इनको रद्द कर इस मामले की जांच शुरू की गई थी। इसी मामले में कमिश्नर प्रदीप डागर का पानीपत से तबादला कर दिया था।