अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। प्रदेश के सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर ने पानीपत सहकारी चीनी मिल की असवनी इकाई में प्रभाव वाष्पीकरण आधारित जीरो लिक्विड डिस्चार्ज का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे मिल के साथ किसानों तक को फायदा पहुंचाने वाला बताया। वे प्रदेश के किसानों की कर्जामाफी पर बोले कि प्रदेश का किसान कर्जवान नहीं बल्कि समृद्ध हैं। उद्घाटन पर विशिष्ठ अतिथि ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा, शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी रहे। समारोह की अध्यक्षता प्रबंध निदेशक बीर सिंह ने की।
मुख्य अतिथि ने हवन में पूर्ण आहुति देने के बाद निर्वहन संयंत्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया। साथ ही यूनिट के प्रांगण में पौधरोपण कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने मीडिया के किसानों के कर्ज माफी के सवाल पर कहा कि यहां का किसान कर्जदार नहीं है। वह खेती कर समृद्ध बना है। ग्रोवर ने कहा कि इस बार प्रदेश की सभी शुगर मिलों को निर्बाद्ध गति से चलाया गया। उनके विभाग से संबंधित शुगर मिलों ने किसानों को निर्धारित समय सीमा के अंदर ही भुगतान भी किया है। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है। इसलिए जल की बचत की जानी चाहिए। इस इकाई के लग जाने से प्रतिदिन चार लाख लीटर पानी की बचत हो सकेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 13 असवनी इकाई भले ही हों, लेकिन पानीपत इकाई ही 50 लाख लीटर एथनॉल प्रतिवर्ष बनाने वाली इकाई है। अब यह प्लांट 12 महीने बिना रुकावट के चलेगा। इससे इसकी एथनॉल बनाने की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। यह प्रदेश में रिकॉर्ड उत्पादन होगा। प्रदेश में पेट्रोल में पांच प्रतिशत एथनॉल मिलाया जाता है। इस हिसाब से प्रदेश में छह करोड़ लीटर ऐथनॉल की आवश्यकता है। वर्तमान में तीन करोड़ लीटर से भी कम एथनॉल मिल पा रहा है। शीघ्र ही 10 प्रतिशत एथनॉल पेट्रोल में मिलाने की योजना है। इस हिसाब से प्रतिवर्ष 12 करोड़ लीटर एथनॉल की आवश्यकता होगी। यह तभी संभव है जब पानीपत एथनॉल इकाई जैसी और इकाई भी अपनी कार्य क्षमता को बढ़ाएं। एथनॉल बनाने में पानी अधिक उपयोग होता है। पानीपत की इकाई में 4 लाख 50 हजार लीटर पानी की प्रतिदिन खपत होती है। असवनी इकाई में प्रभाव वाष्पीकरण आधारित शून्य तरल निर्वहन संयंत्र चालू होने से प्रतिदिन 3 लाख 60 हजार लीटर पानी को शुद्ध बनाकर पुन: उपयोग में लाया जा सकेगा। शेष बचे 80 हजार लीटर तरल पदार्थ से खाद बनाई जाएगी।
उन्होंने किसानों से सवाल किया कि 1956 में जब पानीपत शुगर मिल लगी थी, तब इसकी चीनी और असवनी पूरे हरियाणा में नाम से बिकती थी। इन 61 सालों में पिछली सरकारों ने मिलों के उत्पादन की क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया। वर्तमान सरकार ने मिलों की क्वालिटी पुन: स्थापित करने के प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि पानीपत के डाहर में लगने वाली नई शुगर मिल को 2018 तक बनाकर चालू कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र से हरियाणा का गन्ना अच्छा है, फिर भी हरियाणा की शुगर मिल घाटे में और महाराष्ट्र की शुगर मिल मुनाफे में हैं। वे अधिकारियों के साथ महाराष्ट्र के दौरे पर गए तो पता चला कि महाराष्ट्र की शुगर मिलों के मुकाबले हरियाणा की शुगर मिलों में कुप्रबंधन और सरकारी हस्तक्षेप अधिक है। इसलिए यहां की मिलों की कार्य प्रणाली में सुधार लाने का निर्णय लिया गया। सरकार ने संकल्प लिया कि स्वर्ण जयंती वर्ष में सभी शुगर मिलों को लाभ में लाने और आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने किसानों से भी शुगर मिल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सहयोग मांगा। डिस्टलरी मैनेजर डॉ. आरके सरोहा, एआरटीएस चठ्ठा, आरओ भूपेंद्र चहल ने मुख्य अतिथि और विशिष्ठ अतिथियों को स्मृति चिह्न और शॉल भेंट की। इस अवसर पर चेयरमैन एसपी सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष गजेंद्र सलूजा, मेघराज गुप्ता, दुष्यंत भट्ट, देव मलिक, हवासिंह, दिलबाग सिंह, भूपेंद्र चहल, ललित मलिक, चीफ केमिस्ट एसपी सिंह, धर्मपाल जांगलान, रोशनलाल छौक्कर, प्रताप आटा, सूरज चुलकाना, सेठपाल, कुलदीप जांगड़ा, अमरजीत कोहली संजीव शर्मा, विपिन ढाका और सुधीर कुमार, हवासिंह आदि मौजूद रहे।