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23 करोड़ के पार्कों के टेंडर रद्द करने की प्लानिंग में जुटा नगर निगम, एक साल के विकास कार्यों के एस्टीमेट के कागजात देने के लिए

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फोटो 15 व 16
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विकास कार्यों के एस्टीमेट की नहीं दी रिपोर्ट, मांगा समय, रद्द हो सकता है टेंडर
-पार्कों की मरम्मत के लिए निकाले थे साढ़े 23 करोड़ के टेंडर, निवर्तमान पार्षदों ने की थी गड़बड़ी की शिकायत अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। शहर के पार्कों की मरम्मत के लिए साढ़े 23 करोड़ का टेंडर निकालकर फंसे अधिकारी नगर निगम के एक साल के विकास कार्यों के एस्टीमेट की रिपोर्ट शुक्रवार को सीएम के तकनीकी सलाहकार विशाल सेठ को नहीं दे पाए। निगमायुक्त ने इसके लिए एक सप्ताह का और समय मांगा है। वहीं मामले के शिकायतकर्ता निवर्तमान पार्षद व भाजपा नेता दुष्यंत भट्ट ने सीएम मनोहर लाल से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आरोप है कि विकास के नाम पर कमीशन कमाने के चक्कर में फंसे अधिकारी अब अपने आप को बचाने में लग गए हैं। तकनीकी सलाहकार विशाल सेट को रिपोर्ट सौंपने से पहले नगर निगम अधिकारी साढ़े 23 करोड़ के विवादित टेंडर को रद्द करने का प्रयास कर रहे हैं। इनके टेंडर शॉर्ट में दोबारा लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि नगर निगम के आला अधिकारियों ने इस बारे में चंडीगढ़ में नगर निगम कमिश्नर से चर्चा भी की है। बताया जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से ही अफसरों ने पार्कों की मरम्मत के नाम पर कमीशन खाने के लिए ये फर्जी प्लानिंग बनाई थी। इसीलिए जनप्रतिनिधियों ने शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
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अब यह टेंडर भी होंगे रद्द
अफसरों ने सेक्टर 25 पार्ट वन और सेक्टर 29 पार्ट वन में सड़के बनाने के लिए 16 करोड़ के टेंडर निकाले थे। शर्तों के कारण एक एजेंसी ही इसमें खरा उतर पाई थी। विशाल सेठ ने अफसरों से एक साल का एस्टीमेट मांगा था इसीलिए अब दोनों टेंडर रद्द होंगे और इन को नए सिरे से लागू किया जाएगा।

ये है पूरा मामला:
2015 में सीएम ने पानीपत में कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन खरीदने के लिए 22 करोड़ रुपये दिए थे। लेकिन नगर निगम अधिकारियों ने इस पैसे का इस्तेमाल नहीं किया। निगमायुक्त प्रदीप डागर ने आने के बाद इस पैसे का इस्तेमाल पार्कों के टेंडर निकालने में किया। ब्याज समेत ये पैसे साढ़े 23 करोड़ हो चुके थे। पार्कों के टेंडर जरूरत के अनुसार नहीं निकाले गए। जिन पार्कों का निर्माण कार्य महज दो लाख रुपये में पूरा हो सकता है, उनके लिए भी 50-50 लाख रुपये के टेंडर निकाल दिए गए। पार्कों के नए टेंडर ग्रिल पुरानी लगा दी गई। कई निवर्तमान पार्षदों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। भाजपा नेता दुष्यंत भट्ट ने सीएम को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की थी। पिछले शुक्रवार को इसी शिकायत पर चंडीगढ़ से जांच करने के लिए तकनीकी सलाहकार विशाल सेठ पानीपत आए थे।

पार्कों के टेंडर बेतुके हैं
पार्कों के बेतुके टेंडर लगाए गए है। जिन पार्कों का काम 20 लाख में पूरा हो सकता है उनका एक एक करोड़ का टेंडर लगाया गया है। पार्कों का पहले का विकास कार्य ही पूरा नहीं हुआ था। उनके दोबारा टेंडर लगा दिए गए हैं। साढ़े 23 करोड़ के टेंडर बहुत बड़ा गड़बड़झाला है। ये सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
-दुष्यंत भट्ट, निवर्तमान पार्षद व भाजपा नेता

एक सप्ताह में पूरी रिपोर्ट चंडीगढ़ जमा करवा देंगे
कमीशनखोरी के आरोप बिल्कुल गलत हैं। टेंडरों में कोई गड़बड़ नहीं की गई है। मैं हर प्रकार की जांच के लिए तैयार हूं। एक साल के विकास कार्यों के एस्टीमेंट कर रिपोर्ट एक सप्ताह में तकनीकी एडवाइजर को सौंप दी जाएगी।
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प्रदीप डागर, नगर निगम कमिश्नर

मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को नहीं छोड़ेंगे: सेठ
नगर निगम कमिश्नर ने रिपोर्ट देने के लिए एक और सप्ताह का समय मांगा है। रिपोर्ट के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। दोषियों को किसी भी सूरत में नहीं छोडू़ंगा। मेरे ऊपर किसी पर का कोई दबाव नहीं है।
-विशाल सेठ, तकनीकी सलाहकार
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