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बिना परमिट के सड़कों पर दौड़ रही 550 कमर्शियल गाड़िया, परिवहन प्राधिकरण को लग रहा हर साल 23 लाख चूना

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बिना परमिट चल रहीं 550 कमर्शियल गाड़ियां
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संदीप भौरिया
पानीपत।
मिनी सचिवालय के सामने अवैध टैक्सी स्टैंड में खड़ी होने वाली 500 गाड़ियों के मालिकों के पास कमर्शियल परमिट भी नहीं हैं। ये गाड़ियां कमर्शियल इस्तेमाल में सड़कों पर भी दौड़ती हैं, लेकिन कोई रोकने टोकने वाला नहीं होता। निजी प्रयोग से कमर्शियल के लिए जारी होने वाले परमिट की एवज में 4200 रुपये जमा करवाने होते हैं। इस तरह 550 गाड़ियां बिना परमिट चलने के कारण क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) को 23 लाख रुपये की चपत लग रही है। वहीं परमिट लेने के बाद हर साल नवीनीकरण कराने की एवज में भी विभाग को सालाना 50 हजार रुपये तक घाटा रहा है।

1055 टैक्सियों को जारी किए हैं परमिट
आरटीए के अनुसार 1055 गाड़ियों को टैक्सी परमिट जारी किया हुआ है। इनमें मैक्सी कैब, क्रूजर, मैजिक, सूमो, बोलेरो, वैन कार हैं। परमिट जारी होने के बाद गाड़ियों की नंबर प्लेट भी पीली लगाई जाती है। पानीपत में एचआर 06 के बाद कमर्शियल परमिट के बाद एचआर 67 के अनुसार नंबर लग जाता है। रविवार को मिनी सचिवालय के सामने खड़ी 250 गाड़ियों में से मात्र 10 वैन पर ही पीली प्लेट लगी थी। बाकी अन्य गाड़ियां निजी नंबरों वाली मिलीं, जिन्हें कमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा है।
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इन गाड़ियों को मिला है परमिट
525 कारों को, 225 जीप को, 1500 ऑटो, 250 टाटा मैजिक को, 980 ई रिक्शा को, 4800 ट्रक को, 1190 स्कूली बसों को परमिट जारी हुआ है।

कमर्शियल गाड़ी में ये होनी चाहिए सुविधा
जीपीएस, फर्स्ट एड बॉक्स, गाड़ी के साइड में पीली पट्टी, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट पीले रंग की, आग बुझाने का यंत्र, स्टेफिनी, आगे पीछे रिफलेक्टर, चारों इंडिकेटर व स्पीड मीटर सही होना चाहिए। गाड़ी के शीशे भी सही होने चाहिए। अगर गाड़ी चालक इन नियमों को पूरा नहीं करता तो पकड़े जाने पर 2 से 10 हजार रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है।

स्थायी स्टैंड नहीं दिया तो बेच दीं सभी परमिट वाली गाड़ियां
अस्थायी टैक्सी स्टैंड पर खड़ी कमर्शियल वाली गाड़ियों के मालिकों का कहना है कि उनके पास 5 साल पहले कमर्शियल गाड़ियां होती थीं। बहुत बार जिला प्रशासन से मांग करने के बाद भी स्थायी टैक्सी स्टैंड नहीं मिला। नाम नहीं छापने की शर्त पर गाड़ी मालिकों ने बताया कि ज्यादातर ने कमर्शियल गाड़ियां बेचकर निजी नंबर वाली ही खरीद ली, क्योंकि कमर्शियल परमिट की एवज में उन्हें विभाग को बिना सुविधा मिले ही फीस जमा करवानी पड़ती थी।

साल में 300 चालान
आरटीए ने एक साल में सवारियों वाली मैक्सी कैब के ही 350 चालान काटे हैं। इसमें 2 से 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। ओवरलोड वाहनों के अलावा बिना परमिट की गाड़ी चलाने वालों का कोई चालान नहीं हुआ।

यह है परमिट का नियम:
नई गाड़ी खरीदने पर आरसी जारी होने के 1 सप्ताह में कमर्शियल परमिट लेना होता है। इसके लिए पहले 38 सौ रुपये जमा करवाने होते थे, लेकिन नए नियमों के अनुसार अब 42 सौ रुपये जमा करवाने होते हैं। वहीं पुरानी गाड़ियों पर आरसी जारी होने के 3 साल के अंदर ही कमर्शियल परमिट लेना होता है। पुरानी गाड़ियों की आरसी भी नए सिरे से बनती है।
कमर्शियल परमिट के बाद इसे हर साल नवीनीकरण कराना होता है। इसके लिए गाड़ी मालिक को 500 रुपये जमा करवाने होते हैं। जिन वाहन चालकों ने परमिट नहीं लिए हैं, वे सीधे तौर तक धारा 66-192ए (1) का उल्लंघन कर रहे हैं। इस धारा का उल्लंघन करने पर 2 हजार से 5 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
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कमर्शियल वाहनों का परमिट होना जरूरी है। अगर बिना परमिट के कमर्शियल वाहन चल रहे हैं तो इन पर कार्रवाई होगी। इस बारे में जल्द प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगे और सख्ती बरतेंगे।
- सुमेधा कटारिया, डीसी पानीपत।
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