पानीपत। पानीपत में टीबी उन्मूलन पर फोकस है। इसके लिए बनाई गई 15 सदस्यों की टीबी फोरम टीम लोगों की लगातार स्क्रीनिंग कर रही है। जिले में चार सालों में टीबी के 10464 मरीज मिले हैं वहीं इस बीमारी से इस बीच मरने वालों की संख्या 401 थी। स्वास्थ्य विभाग ने 2023 तक समालखा व मतलौडा को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। यहां जागरूकता कम होने के कारण टीबी के मरीज मिल रहे हैं। विभाग की टीमें स्लम बस्तियों में मरीज ढूंढ रही है।
जिले में इस साल 11 लाख 70 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 0.004 फीसदी यानी सिर्फ 56 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। मरीजों में टीबी के लक्षण मिलने पर उनकी बलगम जांच व एक्स-रे भी कराए गए हैं। इस साल अभी तक 840 मरीजों की पहचान की जा चुकी हैं जबकि 16 लोगों की जान टीबी ने ली है। इससे पहले वर्ष 2020 में 3095 मरीज और 2019 में 3585 मरीज मिले थे। इन वर्षों में मौत का आंकड़ा क्रमश: 144 और 121 रहा। जिला नोडल अधिकारी डॉ. आशीष ने बताया कि अब पानीपत टीबी मुक्त की ओर है। पानीपत में 2023 तक समालखा व मतलौडा को टीबी फ्री ब्लॉक बनाने का लक्ष्य रखा है। लोगों में भी जागरूकता आई है। चिह्ति किए गए मरीज अब दवा का कोर्स भी पूरा कर रहे हैं।
जिले में तीन स्थानों पर बलगम की जांच
सिविल अस्पताल में सीबी-नॉट मशीन है। सब डिविजनल अस्पताल समालखा और सीएचसी मतलौडा में ट्रू-नेट मशीन लगी है। सभी सरकारी फैसिलिटी सेंटर से एकत्र बलगम के सैंपल की जांच यहीं होती है।
कब कितने मरीज मिले-
साल कुल मरीज मौत
2018 2944 120
2019 3585 121
2020 3095 144
2021 840 16
स्वास्थ्य विभाग की टीमें फील्ड में लगातार कर रही हैं काम
विभाग का लक्ष्य जिले को टीबी मुक्त करना है। विभाग की टीमें लगातार फील्ड में काम कर रही है। टीबी के रोगी का दवा का कोर्स पूरा कराने का भी प्रयास होता है। 2023 तक जिले के दो ब्लॉक समालखा और मतलौडा टीबी मुक्त होंगे। -डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन पानीपत।