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दलित संगठन दलित मंत्रियों, सांसदों व विधायकों से मांगे इस्तीफे

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अमर उजाला ब्यूरो,
पानीपत। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 20 मार्च को एससी-एसटी मामलों को लेकर दिए गए फैसले को लेकर शनिवार को पानीपत के दलित संगठनों ने अमर भवन चौक स्थित रविदास धर्मशाला में बैठक की। जिसमें सभी दलित संगठनों ने इस फैसले को दलितों के खिलाफ बताया और इस फैसले को वापस करवाने के लिए दलित संगठनों ने संविधान बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया है। बैठक में तय किया कि हरियाणा व केंद्र सरकार में जितने भी दलित मंत्री, सांसद व विधायक है, उन्हें तुरंत दलित समाज के हित में अपना इस्तीफा देकर समाज के साथ आ जाना चाहिए। यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो दलित समाज फिर अपने ही समाज के विधायकों, सांसदों व मंत्रियों का सामाजिक बहिष्कार करेगा।
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बैठक में तय किया गया कि सोमवार को जिले के सभी दलित संगठनों के गणमान्य व्यक्ति लघु सचिवालय में भारी संख्या में एकत्रित होंगे और न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने के लिए उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम रोष प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपेंगे। दलित संगठनों द्वारा 2 अप्रैल को किए जाने वाले भारत बंद को लेकर उस दिन पानीपत जिले में भी पूर्ण रूप से बंद रखा जाएगा। 14 अप्रैल को डॉ. अंबेडकर जयंती समारोह में किसी भी पार्टी के राजनेता को नहीं बुलाया जाएगा। मीटिंग की अध्यक्षता सतीश चौहान ने की। मंच संचालन बलजीत सारसर ने किया। इस अवसर पर प्राण रत्नाकर, राजेश सरोहा, राजेंद्र पूनिया, राजेश दहिया, मामराज वाल्मीकि, दलबीर रंगा, सतपाल दहिया, सतप्रकाश वैध, नंद किशोर पुहाल, रमेश पुहाल, कर्मचंद पूनम, राजबीर पोढिया, नवीन भूंबक, अश्वनी, कृष्ण दुगल, गिना राम वाल्मीकि, श्रीकृष्ण सरपंच, अमित उग्राखेड़ी, राजू पहलवान उग्राखेड़ी, बसंत कोच, गोविंदा लाहौट, सज्जन सिंह, रविंद्र तोशामड़ एडवोकेट, महाबीर सिंह कटारिया व रोहताश ढाबड़ा मौजूद रहे।
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दलित संगठनों ने दलित मंत्रियों, सांसदों व विधायकों से मांगे इस्तीफे
-दलित संगठनों के आहवान पर 2 अप्रैल के भारत बंद को पानीपत में बनाएंगे सफल
-सामूहिक रूप से मनाई जाएगी अंबेडकर जयंती, नेताओं की जयंती में आने पर होगी मनाही
फोटो संख्या 14 व 15
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