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भद्रा और सूतक के बीच में बहनों ने भाई की कलाई पर बांधी राखी

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भद्रा और सूतक के बीच में बहनों ने भाई की कलाई पर बांधी राखी
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। रक्षाबंधन पर बहनों ने भद्रा के समाप्त होने और सूतक लगने से पहले ही रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया। इस बार का रक्षाबंधन पर्व साव माह के आखिरी सोमवार को भी होने के चलते कुछ खास रहा।
रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से 11:04 बजे तक भद्रा काल का असर रहा और दोपहर के 1:53 बजे से सूतक समय का आरंभ हो गया। विद्वान के बताए शुभ मुहूर्त 11:05 से 1:52 मिनट के बीच में ही जिलेभर में बहनों ने अपने भाइयों के हाथों पर राखी बांधी और भाइयों की लंबी उम्र की कामना की। वहीं भाइयों ने भी अपनी बहनों की रक्षा की कसम ली। बहनों के साथ भाइयों में रक्षाबंधन को लेकर बहनों में काफी उत्साह रहा। वहीं सोमवार की रात 10:53 मिनट पर पूर्ण चंद्रग्रहण लग गया। बहनों ने शहर के बाजारों से भाइयों की मनपसंद राखी लाकर बांधी। अबकी बार बहनों ने छोटे भाइयों के लिए कार्टून की राखियां बांधी तो बड़े भाइयों के लिए ब्रेसलेट वाली राखी बांधी। बहनों ने अपने भाइयों के लिए एक से बढ़कर एक लेटेस्ट डिजाइनों की राखी खरीदी। इन सबके चलते बाजार में मिठाई व राखी की दुकानों पर काफी भीड़ लगी रही।
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भाई की लंबी उम्र के लिए शुभ मुहूर्त में ही बहनों ने बांधी राखी
भाई की लंबी उम्र के लिए बहनों ने शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधी। चूंकि अबकी बार रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा और सूतक दोनों ही अलग-अलग समय में भारी पड़ रहे थे। जिस कारण शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधी और कहा भी जाता है कि भद्रा में सूपर्नखा ने अपने भाई रावण को राखी बांधी थी जिससे उसका विनाश हो गया था। इसलिए भद्रा में राखी नहीं बांधी जाती है और ग्रहण लगने के बाद सूतक लग जाता है जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
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