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Panchkula News: नवांशहर में बब्बर खालसा से जुड़े रहे युवक की गोलियां मारकर हत्या

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नवांशहर। यहां रोपड़ रोड पर बुधवार की देर रात बब्बर खालसा टाइगर फोर्स के आतंकी रहे रतनदीप सिंह का गोलियां मारकर कत्ल कर दिया गया। उस समय रतनदीप के साथ उसका भांजा भी था। हालांकि उसे कोई चोट नहीं आई है। इसकी जिम्मेदारी नवांशहर के कुख्यात गैंगस्टर गोपी नवांशहरिया ने ली है। इसको लेकर गोपी ने एक पोस्ट डाल कर लिखा- तुमने कई माताओं के बच्चे मरवाए और कई लोगों के साथ ठगी की, इसलिए तुम्हें नरक में भेज दिया है। अब तुम्हारे साथियों की बारी है। उन्हें कहो बच कर रहें। जब मिलेंगे उन्हें भी नरक में भेजा जाएगा।
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पुलिस ने गोपी सहित अन्य शूटरों के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नवांशहर के सरकारी अस्पताल में वीरवार को रतनदीप सिंह का पोस्टमॉर्टम करवाया गया। उसने हरियाणा और चंडीगढ़ में ब्लास्ट करवाए थे। रतनदीप हरियाणा के करनाल का रहने वाला था।
जानकारी के अनुसार रतनदीप भांजे के साथ अपनी काले रंग की एमजी हेक्टर कार (एचआर-05-बीजे-4505) में करनाल से नवांशहर के बलाचौर किसी काम से आया था। इस बीच गांव गड़ी कानूनों के पास स्थित संत गुरमेल सिंह मेमोरियल अस्पताल के सामने 2 बाइक सवारों ने उस पर फायरिंग कर दी। इसमें रतनदीप के पेट और छाती में कई गोलियां लगीं, जबकि भांजे की जान बाल-बाल बच गई। रतनदीप सिंह का मौके पर काफी खून बह गया था। जब उसे निजी अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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नवांशहर के एसपी-डी मुकेश कुमार ने बताया कि मौके से पुलिस ने कई खोल बरामद किए हैं। भांजे से पूछताछ की जा रही है। पुलिस के हाथ कुछ सीसीटीवी फुटेज भी लगे हैं। इसके आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है। पुलिस मामले में टारगेट किलिंग के एंगल पर भी जांच कर रही है। रतनदीप सिंह बब्बर खालसा टाइगर फोर्स का एक्टिव मेंबर था। किसी समय भारतीय एजेंसियों ने रतनदीप पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था। पुलिस ने रतनदीप को साल 2014 में हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के वक्त वह अपने घर किसी काम से आया था। 2019 में रतनदीप जेल से बाहर आ गया, जिसके बाद वह अपने परिवार के साथ शांति की जिंदगी जी रहा था।

रतनदीप सिंह ने 1999 में चंडीगढ़ के पासपोर्ट ऑफिस में ब्लास्ट किया था। पुलिस ने इस केस में रतनदीप को मुख्य आरोपी बनाया था। इसके कुछ देर बाद ही रतनदीप और उसके साथियों ने हरियाणा के पानीपत में रेलवे ब्रिज को बम से उड़ा दिया था। इसमें जब पुलिस ने जांच की तो रतनदीप की शमूलियत सामने आई।
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