अदालत ने पुलिस जांच पर जताई नाराजगी
स्वतंत्र गवाह न जोड़ने और जांच प्रक्रिया में खामियों पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। जिला अदालत ने हेरोइन तस्करी के छह साल पुराने मामले में कालका निवासी विशाल उर्फ बाबू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में पुलिस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई गंभीर कमियों के कारण अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार 10 दिसंबर 2019 को क्राइम ब्रांच की टीम ने कालका स्थित काली माता मंदिर के पास परवाणू रोड से विशाल उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि आरोपी ने अपनी जैकेट की जेब से एक पॉलीथिन निकालकर फेंकने का प्रयास किया, जिसमें से 10 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ कालका थाना में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि कथित बरामदगी भीड़भाड़ वाले क्षेत्र से दिखाई गई, लेकिन पुलिस ने जांच में किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया। अदालत ने भी इस पहलू को महत्वपूर्ण माना।
अदालत ने यह भी पाया कि मौके पर सीएफएसएल फॉर्म-29 तैयार नहीं किया गया था, जबकि एनडीपीएस मामलों में साक्ष्यों की शुचिता बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक मानी जाती है। इसके अलावा बरामद नमूना छह दिन बाद एफएसएल मधुबन भेजा गया और अभियोजन पक्ष इस देरी का संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर सका।
इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रहा। इसके आधार पर आरोपी विशाल उर्फ बाबू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।