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विश्व बैंक और एशियन बैंक पंजाब को देंगे 22 अरब रुपये का लोन

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चंडीगढ़। विश्व बैंक और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) ने पंजाब म्युनिसिपल सेवा सुधार प्रोजेक्ट के तहत अमृतसर व लुधियाना में नहरी पानी पर आधारित पेयजल योजनाओं के लिए 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 21 अरब, 98 करोड़, 63 लाख, 25 हजार रुपये) के कर्ज को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पेयजल की 24 घंटे सप्लाई और अमृतसर व लुधियाना में पानी के नुकसान को कम करना है।
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उल्लेखनीय है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विश्व बैंक और एआईआईबी का कर्ज हासिल करने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष पैरवी की थी ताकि उक्त दोनों शहरों के लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराया जा सके। नहरी पानी पर आधारित पेयजल सप्लाई के दो अन्य प्रोजेक्ट जालंधर और पटियाला में पहले निर्माणाधीन हैं। फिलहाल अमृतसर और लुधियाना में ट्यूबवेलों के जरिए भूजल को पीने के पानी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक भूजल का बहुत अधिक दोहन किया जा चुका है और पेयजल का स्तर बिगड़ गया है। इससे सेहत पर बुरा असर हो रहा है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए आईबीआरडी (विश्व बैंक) की तरफ से 105 मिलियन डॉलर का कर्ज, एआईआईबी की तरफ से 105 मिलियन का कर्ज दिया जाएगा, जबकि पंजाब सरकार के पास 90 मिलियन डॉलर के फंड मौजूद हैं।
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प्रवक्ता ने बताया कि अमृतसर के प्रोजेक्ट के लिए पानी का स्त्रोत अपर बारी दोआब नहर होगा। इसके तहत नहरी पानी को साफ करने के लिए जिले के गांव वल्ला में 440 मिलियन लीटर (करीब 44 अरब लीटर) पानी साफ करने की क्षमता वाला जल संशोधन संयंत्र लगाया जाएगा। पानी को साफ करने के बाद इसे ओवरहेड सर्विसेज रिजर्व (ओएचएसआर) में डाल दिया जाएगा, जो आगे शहर वासियों द्वारा पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे अमृतसर के लिए वर्ष 2025 तक 14.51 लाख और 2055 तक 22.11 लाख की अनुमानित आबादी के तहत लोगों को लाभ मिलता रहेगा। वर्तमान में अमृतसर में नहरी पानी आधारित जल सप्लाई प्रोजेक्ट 784.33 करोड़ रुपये में मेसर्स लार्सन एंड टुर्बो लिमिटेड को दिया गया है।
लुधियाना में पेयजल प्रोजेक्ट के लिए पानी की सप्लाई का स्त्रोत सरहिंद नहर होगी। नहरी पानी को साफ करने के लिए 580 मिलियन लीटर प्रतिदिन शोधन की क्षमता वाला जल संशोधन प्लांट लगाया जाएगा। इस पानी को साफ करने के बाद ओवरहेड सर्विसेज रिजर्व (ओएचएसआर) में डाल दिया जाएगा जो आगे शहरवासियों द्वारा पेयजल के रूप में इस्तेमाल होगा। इसके लिए बुनियादी ढांचा इस तरह बनाया गया है ताकि 30 साल के लिए पानी की मांग को पूरा किया जा सके। इससे लुधियाना के लिए वर्ष 2025 तक 20.76 लाख और 2055 के लिए 29.35 लाख की अनुमानित आबादी के तहत लोगों को लाभ मिल सकेगा। लुधियाना प्रोजेक्ट की अनुमानित निर्माण लागत 1093.92 करोड़ रुपये है और इसे 36 महीनों के समय पर पूरा किया जाना है।
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