संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। आईटीबीपी भानु में सोमवार को आयोजित दीक्षांत एवं शपथ ग्रहण समारोह में भावनाओं का एक अनोखा संगम देखने को मिला। पिथौरागढ़, उत्तराखंड की महिला प्रशिक्षु कमलेश वलदिया ने 44 सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग पूरी कर वर्दी संभाली और देश सेवा की शपथ ली।
कमलेश की कहानी हौसले और साहस का जीवंत उदाहरण है। उनके पति पहले आईटीबीपी में तैनात थे लेकिन हिमाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। इस हादसे ने उनके जीवन में गहरा संकट ला दिया लेकिन कमलेश ने हार नहीं मानी।
पति के निधन और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच, दो बच्चों की परवरिश और आर्थिक तंगी को झेलते हुए कमलेश ने आईटीबीपी में भर्ती होकर कठिन प्रशिक्षण पूरा किया। दीक्षांत समारोह के दौरान सलामी देते समय उनके चेहरे पर भावनाओं की झलक साफ देखी जा सकती थी।
कमलेश ने कहा कि आज मैं अपने पति की जगह वर्दी पहनकर गर्व महसूस कर रही हूं। यह वर्दी सिर्फ मेरा नहीं बल्कि मेरे परिवार और देश की जिम्मेदारी का प्रतीक है। उनकी आंखें गर्व और खुशी से नम हो उठीं। कमलेश वलदिया की इस प्रेरक कहानी ने सभी के दिलों को छू लिया और साबित कर दिया कि कठिनाइयां चाहे कितनी भी बड़ी हों, हौसला और साहस उन्हें पार कर सकता है।