वार्डबंदी, आरक्षण और ईवीएम विवाद पर 1 अप्रैल को सरकार देगी जवाब
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम चुनाव से पहले वार्डबंदी और आरक्षण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति (एससी) सीटों में कटौती और जनसंख्या आंकड़ों में अंतर पर कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार से 1 अप्रैल को हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
एससी आबादी पर कोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि एससी के लिए आरक्षित सीटें चार से घटाकर तीन किस आधार पर की गईं। सरकार ने दलील दी कि 2020 में वार्डबंदी के समय स्पॉट सर्वे किया गया था, जबकि इस बार 2011 की जनगणना के आधार पर आंकड़े लिए गए हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि पहले करीब 70 हजार बताई गई एससी आबादी अब घटकर 41 हजार कैसे रह गई। अदालत ने इस विसंगति का ठोस जवाब शपथ पत्र के जरिए मांगा है।
बैलट पेपर बनाम ईवीएम पर भी सुनवाई
इसी दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रविंद्र रावल की याचिका पर भी सुनवाई होगी। याचिका में मांग की गई है कि चुनाव बैलट पेपर से कराए जाएं या ईवीएम के साथ वीवीपीएटी मशीन का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
चुनाव की राह पर अनिश्चितता
नगर निगम चुनाव का भविष्य अब कोर्ट के रुख पर निर्भर हो गया है। यदि वार्डबंदी या मतदान प्रक्रिया को लेकर कोई कड़ा निर्देश आता है, तो चुनाव में देरी संभव है। फिलहाल शहर की सियासी हलचल 1 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी है।