फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panchkula News: पति की आत्महत्या के मामले में पत्नी को नियमित जमानत, हाईकोर्ट ने कहा-उकसावे का ठोस प्रमाण जरूरी

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पति की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार महिला को नियमित जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि केवल घरेलू विवाद या कथित उत्पीड़न से आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता।
विज्ञापन


जस्टिस मनीषा बत्रा ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध तभी बनता है, जब अभियोजन यह साबित करे कि आरोपी ने आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाया, जानबूझकर सहायता की और घटना के समय के आसपास कोई सकारात्मक (पॉजिटिव) कृत्य किया। आत्महत्या के समय करीब कोई ठोस और सकारात्मक कृत्य न होने पर धारा 108 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।

क्या है मामला :

एफआईआर नंबरदार रंजीत सिंह के बयान पर दर्ज की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके चचेरे भाई करतार सिंह का विवाह याचिकाकर्ता सतनाम कौर से हुआ था और दांपत्य विवाद के चलते दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे जिससे मृतक मानसिक रूप से परेशान रहता था।
विज्ञापन


21 जून को याचिकाकर्ता और उसकी बहन ने मृतक से कथित तौर पर मारपीट और गाली-गलौज की, जिसके बाद वह घर से चला गया और वापस नहीं लौटा। 25 जून को उसका शव गांव ढूंढ के पास एक नहर से बरामद हुआ। आरोप लगाया गया कि पत्नी ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर आत्महत्या के लिए उकसाया। सतनाम कौर को 25 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह करीब सात महीने से न्यायिक हिरासत में थी। जांच उसके खिलाफ पूरी हो चुकी है।
अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया प्रत्यक्ष उकसावे के ठोस सबूत नहीं हैं और आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हैं। सह-आरोपियों को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है और मुकदमे के निपटारे में लंबा समय लग सकता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को नियमित जमानत प्रदान कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें