संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। राजकीय महाविद्यालय कालका में वन्य जीवन सप्ताह के अंतर्गत गिद्धों के संरक्षण के लिए एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कालका महाविद्यालय के एसडीजी क्लब, प्राणी शास्त्र विभाग और जटायु कंजर्वेशन एंड ब्रीडिंग सेंटर के सौजन्य से विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए यह व्याख्यान आयोजित किया गया। यहां बताया गया कि 1990 के दशक की शुरूआत से ही गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट देखी गई।खासकर सफेद पीठ वाले गिद्ध और अन्य प्रजातियों में। इस गिरावट का मुख्य कारण मवेशियों में डाइक्लोफिनेक सोडियम और अन्य एनएसएआईडीएस दवाओं का व्यापक उपयोग था।
जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक प्रकाश मेहता ने विद्यार्थियों को गिद्धों के महत्व और उनकी घटती संख्या के बारे में बताया। प्रकाश मेहता ने बताया कि गिद्धों की पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी आबादी में अत्यधिक गिरावट के कारण संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता अनिवार्य हो गई है। बीएनएचएस और हरियाणा वन और वन्य जीव विभाग में पहला संरक्षण अभियान शुरू किया था। इस पहल ने इन-सिट् और एकस-सिट् संरक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया और गिद्ध संरक्षण के एक प्रमुख घटक के रूप में जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र की स्थापना की। प्रस्तुत कार्यक्रम में एसडीजी क्लब की प्रभारी प्रोफेसर डॉक्टर नीरू, सदस्य डॉ. बिंदु रानी, विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर डॉ. रामचंद के मार्गदर्शन और निर्देशन में किया गया। प्रस्तुत कार्यक्रम में डॉ. अजीत, डॉक्टर गुरप्रीत, प्रोफेसर डॉक्टर बिंदु, डॉ. सरिता और प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार वैदिक रिसर्चर भी उपस्थित रहे।