बैंक की शर्त पूरी होने में दिन बचे थे। जब खाताधारक मर गया, तो वह डेबिट कार्ड कैसे इस्तेमाल कर सकता है? लिहाजा कंपनी वादी को पांच लाख रुपये का क्लेम नौ फीसदी ब्याज के साथ दे।
यह फैसला कंज्यूमर फोरम ने एक वाद के निपटारे के दौरान सुनाया है। फोरम के अध्यक्ष अशोक जैन, मेंबर अनीता कपूर और अनिल शर्मा की बेंच ने मृतक के परिजनों को मानसिक प्रताड़ना की एवज में दस हजार रुपये हर्जाना देने के भी आदेश दिए है।
मामले के अनुसार एक युवक ने नया बैंक अकाउंट खुलवाया, जिस पर पांच लाख रुपये तक का पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर भी था।
इसके लिए शर्त थी कि खाताधारक को 90 दिन के अंदर डेबिट कार्ड से कहीं भी खरीददारी करनी थी। इसके बाद ही खाते के मिलने वाला इंश्योरेंस कवर एक्टिव होगा।
खाता खोलने के 45 वें दिन ही युवक की मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने क्लेम मांगा, तो इंश्योरेंस कंपनी और बैंक ने यह कहते हुए मना कर दिया कि जब डेबिट कार्ड यूज ही नहीं किया गया, तो इंश्योरेंस कवर एक्टिव कैसे हो सकता है।
इसके बाद मामला कंज्यूमर फोरम पहुंच गया।
वर्ष-2011 का है मामला
पिंजौर के अब्दुल्लापुर निवासी जगदीश चंद और उनकी पत्नी निर्मल ने कालका स्थित एक्सिस बैंक और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फोरम में याचिका दायर की थी।
इसमें कहा गया था कि उनके बेटे मनोज ने बैंक में अक्तूबर-2011 में खाता खुलवाया था। इसके तहत ही उसे बेनिफिट मिला था। 18 नंवबर 2011 को मनोज की सड़क हादसे में मौत हो गई।
इसके बाद जब संबंधित बैंक में सूचना दी, तो उन्होंने जगदीश को अपना अकाउंट खुलवाने को कहा, ताकि क्लेम की रकम उसमें दी जा सके।
इसके बाद जगदीश ने बैंक के कई चक्कर काटे, लेकिन क्लेम नहीं मिला।
कंपनी ने कहा, नहीं बनता क्लेम
मामला कंज्यूमर फोरम में आने के बाद बैंक और बीमा कंपनी को नोटिस जारी किया गया।
इस पर बैंक ने अपनी दलील में कहा कि क्लेम के लिए मृतक के परिजनों की तरफ से पूरे दस्तावेज नहीं दिए गए। नियम के मुताबिक मौत के 60 दिन के अंदर ही क्लेम मिल सकता है।
जबकि, परिजनों ने इस प्रक्रिया में 243 दिन लगा दिए। इस पर परिजनों ने कहा कि 16 दिसंबर 2011 को ही बैंक में मौत की सूचना दे दी गई थी।
बैंक की तरफ से जो भी दस्तावेज मांगे गए, वह उसे दे दिए गए थे। इसके बाद बैंक ने आश्वासन में ही इतने गुजार दिए।
इसके बाद बीमा कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि जब खाता खुला था, तो उसमें नियम के अनुसार 90 दिन में डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करना था, इसके बाद ही बीमा कवर एक्टिव होता।
डेबिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं हुआ, इसलिए बीमा नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज कर मृतक के परिजनों के हक में फैसला दिया।
क्योंकि, फोरम में साबित हुआ कि परिजनों ने बैंक में मौत की सूचना दी थी, लेकिन बैंक की तरफ से देरी की गई।