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गर्मी बढ़ने से 10 से 15 फीसदी तक गेहूं का झाड कम होने की आशंका, आय कम होने के आसार से परेशान हैं किसान

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सुनाम ऊधम सिंह वाला। करीब एक माह पहले गर्मी की दस्तक से गेहूं उत्पादक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। मार्च माह में लगातार बढ़ रही गर्मी की वजह से गेहूं का झाड़ 10 से 15 फीसदी तक कम होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे हालात में किसानों की आय पर असर पड़ना लाजिमी है। पहले से कर्ज से जूझ रहा किसान अभी से परेशान है। मालवा के किसानों ने एचडी 3086 और 2967 के अलावा डीबीडब्ल्यू 187, 222 व 303 गेहूं की किस्म की बिजाई की है। इसके अलावा पीएयू की किस्मों की बिजाई हुई है।
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कृषि माहिर सोहन सिंह भंगू ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए मार्च माह में ठंड रहना अनुकूल है। ठंड के चलते फसल को पकने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। मार्च में गर्मी पड़ने का सीधा असर गेहूं की फसल पर होगा। उन्होंने बताया कि 20 नवंबर के बाद गेहूं की बिजाई करने वाले किसानों पर इसकी ज्यादा मार पडे़गी। इससे पहले हुई बिजाई वाली गेहूं की फसल ठीक रहेगी। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन में युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की कीमत पहले ही आसमान छू रही है। झाड़ कम होने से किसानों के नुकसान के साथ आम लोगों का नुकसान भी होगा। गांव चट्ठा के किसान बाबू सिंह ने कहा कि मार्च में गर्मी पड़ने से गेहूं की पैदावार कम होगी। इससे उनका आर्थिक रूप से नुकसान होगा। उन्होंने नवंबर के अंत में गेहूं की बिजाई की थी। एकदम से गर्मी होने के कारण दाने का आकार बड़ा नहीं हो पाएगा।
किसान दलीप सिंह ने कहा कि मौसम की मार किसानों पर भारी पड़ रही है। इससे पहले जनवरी व फरवरी में बारिश होती रही और गेहूं की फसल पर इसका असर पडा था। अचानक गर्मी बढ़ने से गेहूं की फसल का झाड़ कम होने की संभावना है। किसान पहले से कर्ज के जाल में फंसे हैं। कुदरती मार को झेलने में अब किसान असमर्थ हैं।
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किसान यूनियन के जिला महासचिव रण सिंह ने कहा कि अचानक गर्मी बढ़ने से गेहूं की फसल प्रभावित होगी। इससे किसानों को आर्थिक तौर पर नुकसान होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के होने वाले नुकसान की भरपाई बोनस के रूप में की जाए।
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