पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत कोसो दूर है। एक बेड पर सर्दी, जुकाम, शरीर में जकड़न और निमोनिया से पीड़ित बच्चों को रखा जा रहा है। इसके अलावा ओपीडी में रिपोर्ट आने में अधिक समय लगने से भी मरीज और तीमारदार परेशान हैं। टोकन सिस्टम के बाद भी दवा लेने में एक घंटे से ज्यादा का समय लग रहा है। शहर के सिविल अस्पताल में रोजाना बच्चों की ओपीडी में चार सौ मरीज आ रहे हैं।
ठंड की वजह से करीब सौ मरीज बढ़ गए हैं। छोटे बच्चों के निमोनिया के मामले बढ़े हैं। रोजाना वार्ड में 15 से 16 बच्चे भर्ती हो रहे हैं। इसमें दूध जमने से सांस लेने में दिक्कत आने के मामले भी बढ़े हैं। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को बच्चों के वार्ड की पड़ताल की तो लोगों ने अपनी परेशानी बयान की। बच्चों के परिजनों का कहना था कि बच्चों को भर्ती करने में भी देरी की जा रही है। दो बार घंटों लाइन में लगने के बाद दवाई के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ा है। इसके बाद भी बाहर से दवाई लाने को कहा जाता है। संवाद
रिपोर्ट तीन दिन बाद मिलेगी
मैं अपने बेटे का इलाज कराने आई। इलाज के लिए डॉक्टरों ने दवा लिखी है। विटामिन के टेस्ट की रिपोर्ट तीन दिन बाद आएगी। इस कारण तीन दिन बाद रिपोर्ट लेने आना पड़ेगा। दोबारा बच्चे को दिखाने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ेगा। -मंजू निवासी मौलीजागरां
रिपोर्ट लेने दोबारा आना पड़ेगा
मेरे बेटे को बुखार के साथ जकड़न हो गई थी। लगातार जकड़न होने के कारण परेशानी हुई। इलाज करवाने अस्पताल लेकर आए। सभी टेस्ट हो गए हैं। रिपोर्ट तीन बजे के बाद आने के कारण फिर दोबारा दिखाने के लिए आना पड़ेगा। -प्रिंस निवासी हरिपुर, रायपुररानी
दवाइयां बाहर से ला रहे
बेटे को सीने में जकड़न होने के बाद निमोनिया की बात सामने आई। तीन दिन पहले उसको अस्पताल में भर्ती किया। पहले बच्चों के आईसीयू वार्ड के वेंटिलेटर पर रखा गया था। इसके बाद राहत मिली। अब वार्ड में ऑक्सीजन दी जा रही है। एक ही बेड पर दो-दो बच्चों को रखा जा रहा है। निमोनिया होने के कारण परेशानी हुई। दवाइयां अधिकतर बाहर से लानी पड़ी हैं। - परवेश, निवासी डेराबस्सी
बच्चे को तीन दिन बाद किया भर्ती
बच्चे को लगातार तीन दिन लाने के बाद भर्ती किया गया है। पहले जांच रिपोर्ट और दवा के लिए दो दिन दो-दो घंटे लाइनों में लगे। बेटे को जब निमोनिया की बात सामने आई तो उसे भर्ती किया गया। एक ही बेड पर दो बच्चों को रखा गया है। - अनीता निवासी सेक्टर -26, चंडीगढ़
ठंड के मौसम में बच्चों में इस तरह की बीमारियां अधिक हो जाती है। पंचकूला जिले के अलावा पंजाब और चंडीगढ़ के मरीज आ रहे हैं। इस कारण मरीज अधिक आने के बाद लाइनें लंबी लग रहीं हैं और एक बेड पर दो-दो बच्चों को रखना पड़ रहा है। डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि दवा और इलाज में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए। दवाओं की व्यवस्था भी की गई है। -रीटा कालरा, पीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर -6