इस समय चंडीगढ़वासी मौसम व वायरल की दोहरी मार झेल रहे हैं। बारिश नहीं होने से उमस व गर्मी में काफी इजाफा हुआ है। दिन और रात के तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किए जा रहे हैं। हवा में नमी अधिक होने के कारण अधिकतर लोग डायरिया, वायरल, हैपेटाइटिस ए और ई से पीड़ित हो गए हैं। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
सेक्टर 16 की ओपीडी में तो एक दिन में 700-800 मरीज आ रहे हैं। सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 400-500 के करीब होता है। शहर के दूसरे अस्पतालों व डिस्पेंसरी में भी मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई तो आगे हालात और बिगड़ सकते हैं। चंडीगढ़ में इस समय बारिश में 21 फीसदी की कमी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वातावरण में पिछले एक से डेढ़ हफ्ते से उमस बढ़ी है। तापमान भी 35 डिग्री के आसपास रिकार्ड किया जा रहा है, जो बैक्टिरिया की ग्रोथ के लिए सबसे उपयुक्त होता है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, बैक्टीरिया उन पर अटैक करता और वे इसके शिकार हो जाते।
दूसरी तरफ मौसम में आए अचानक बदलाव की वजह से हमारा बिहेवियर नहीं बदल पाता। गर्मी से आते ही सीधे एसी में चले जाते हैं या कूलर के सामने बैठ जाते। ठंडा पानी पी लेते हैं। बॉडी के टेम्प्रेचर को कंट्रोल नहीं कर पाते। इससे गले का खराब होना व खांसी आना आम है। उसके बाद बुखार आने लगता है।
वायरल पांच से सात दिन, खांसी दस दिन तक रहेगी
मेडिकल कालेज के इंटरनल मेडिसिन के पूर्व प्रोफेसर डा. राम सिंह ने बताया है कि वायरल कम से कम पांच से सात दिन तक और खांसी 10 दिन तक रह सकती है। यदि किसी को वायरल हुआ है तो उसे आराम करना चाहिए और बुखार के लिए पैरासिटामाल खाना चाहिए। यदि चार से पांच दिन तक बुखार नहीं उतरता है तो उसे कंप्लीट ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। आजकल डेंगू में भी वायरल के लक्षण दिख रहे हैं। डेंगू हो या वायरल दोनों में ही एक बात का ध्यान रखना है कि पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। जितना पानी पीएंगे, उतना जल्दी रिकवर करेंगे।
वायरल और डेंगू के लक्षण में अंतर
यह सीजन वायरल के साथ डेंगू का है। वायरल व डेंगू के कुछ लक्षण मिलते जुलते हैं, लेकिन कुछ बड़े अंतर भी हैं। वायरल में खांसी आना, गला में दर्द, बाडी में दर्द, बुखार और सिर दर्द होता है। डेंगू में इन सबके साथ शरीर में लाल रंग के रेशे पड़ जाते हैं। वायरल में बुखार 101 डिग्री तक जाता है, जबकि डेंगू में बुखार 103 से 104 डिग्री तक रहता है। डेंगू की पुष्टि के लिए एजिला टेस्ट जरूरी है। डेंगू में प्लेटलेट्स नीचे आते हैं। 20 हजार के नीचे प्लेटलेट्स आने पर इसे चढ़ाने की जरूरत होती है। हालांकि इस वक्त डेंगू कंट्रोल में है। अब तक इस सीजन में डेंगू के कुल 25 ही केस आए हैं।
डायरिया व हैपेटाइटिस ए और ई के भी केस
अस्पतालों में डायरिया व हैपेटाइटिस ए और ई के केस भी सामने आ रहे हैं। डायरिया की मुख्य वजह दूषित खाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में लोगों को ताजा खाना ही खाना चाहिए। बाहर के खाने से बचना होगा। दूसरी तरफ दूषित पानी पीने से हैपेटाइटिस ए व ई के केस आ रहे हैं। ऐसे में लोगों को उबाल कर पानी पीना होगा। डाक्टरों के मुताबिक इन सभी बीमारियों के केस 20-25 फीसदी बढ़ गए हैं।
क्या करें बचाव के लिए
बाहर से आने पर या खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं।
पानी उबाल कर पीएं और बाहर का खाना न खाएं।
ताजे फल का सेवन जरूर करें। सेब व नाशपाती खूब आ रहे हैं।
सोने से पहले गुनगुने पानी से गरारे करें। इससे बैक्टीरिया खत्म होंगे।
जब भी खांसी आए तो मुंह पर रुमाल रखें।
बुखार होने पर भीड़-भाड़ जगह जाने पर बचें।
वायरल होने पर घर पर आराम करना जरूरी है।
वायरल होेने पर पानी खूब पीएं। पानी की कमी न होने दें।
पानी के साथ जूस, नमक-चीनी का घोल भी लें।
मौसम में आए बदलाव की वजह से वायरल बढ़ा है। इस समय डेंगू के भी कुछ लक्षण वायरल से मिलते-जुलते हैं। वायरल चार से पांच दिन तक रहता है। यदि वायरल है तो पैरासिटामाल के साथ घर पर आराम करें। यदि बुखार के साथ शरीर में लाल रंग के रेशे हैं तो डाक्टर को दिखाएं।
- प्रोफेसर राम सिंह, पूर्व प्रोफेसर मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल।
इस समय तापमान करीब 35 डिग्री है। हवा में नमी की मात्रा भी काफी ज्यादा है जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे उपयुक्त है। ऐसे में लोगों को एहतियात बरतने की जरूरत है। ताजा खाना खाएं और साफ पानी पीएं। खाना खाने से पहले हाथ धोएं।
- रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ, पीजीआई।