बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के आदेशों को चुनौती देने वाली निजी स्कूलों की याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में बताया कि यह प्रावधान दो वर्ष पहले बनाया गया था। केंद्र सरकार ने भी मामले में जवाब दायर किया है, लेकिन जवाब समय पर नहीं आने के चलते हाईकोर्ट ने अब सुनवाई बुधवार तक स्थगित कर दी है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दायर कर कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब के फीस रेगुलेटरी एक्ट को 2018 में लागू किया था, जिसके तहत निजी स्कूलों को 8 प्रतिशत से अधिक की फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाई गई थी। साथ ही इस एक्ट के तहत स्कूलों को निर्देश दिए गए थे कि वह अपने वार्षिक खर्च और आय की बैलेंस शीट अपलोड करेंगे।
एक्ट के तहत फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी भी गठित की गई थी। दो वर्षों तक किसी भी निजी स्कूल ने इस एक्ट को चुनौती नहीं दी। अब दो वर्षों बाद निजी स्कूल इसे चुनौती दे रहे हैं जो सही नहीं है। इसके साथ ही प्रशासन ने कहा कि 40 के करीब निजी स्कूल अपनी बैलेंस शीट अपलोड कर चुके हैं, कुछ निजी स्कूलों ने ऐसा नहीं किया था जिसके चलते उन्हें नोटिस भेजे गए थे।
याचिका दायर करने वालों में से 15 स्कूलों ने एक्ट लागू किया
प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि जिस एसोसिएशन ने यह याचिका दायर की है, उसके 79 स्कूल सदस्य हैं, उसमें से 45 स्कूलों ने ही याचिका दायर की है अन्य 4 स्कूल गैर-मान्यता प्राप्त हैं। जिन 45 स्कूलों ने याचिका दायर की है उनमें से 15 स्कूल एक्ट के इस प्रावधान को लागू भी कर चुके हैं। जिन स्कूलों ने इस लागू नहीं किया था उन्हें नोटिस भेजे गए थे लेकिन नोटिस का जवाब देने की बजाय इन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। लिहाजा प्रशासन ने इसी दलील के साथ इस याचिका को खारिज किए जाने की मांग की है।