पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के मामलों में पुलिस अधिकारियों के गवाही के लिए पेश न होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आरोपियों व पुलिस अधिकारियों के बीच अपवित्र रिश्ता प्रतीत होता है। हाईकोर्ट ने कहा कि नशा समाज को दीमक की तरह खा रहा है और ऐसे में अब सरकार को नींद तोड़ने और पुलिस को व्यवस्थित करने की जरूरत है।
हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति पंजाब के गृह सचिव को भेजने का निर्देश भी जारी किया है। हाईकोर्ट के समक्ष नशा तस्करी के मामले में जमानत की मांग वाली याचिका पहुंची थी, जिसमें 11 सुनवाई के बावजूद एक भी सरकारी गवाह पेश नहीं हुआ था। इसके बाद अदालत को एक सरकारी गवाह के खिलाफ गैर जमानती वारंट तक जारी करना पड़ा था।
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हाईकोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है, जहां सरकारी गवाहों के पेश न होने के चलते ट्रायल लटकता है और आखिरकार नशा तस्करों को जमानत मिल जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों के गवाही पर न पहुंचने पर हाईकोर्ट जब एसएसपी को तलब करते हैं तो अगली ही तारीख पर पुलिस अधिकारी ट्रायल कोर्ट के समक्ष गवाही के लिए पहुंच जाते हैं। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा क्या है कि अधिकारी अदालत के समक्ष अपना चेहरा दिखाने से हिचकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि नशा तस्करों को लंबी हिरासत के आधार पर जमानत मिल जाए इसलिए पुलिस अधिकारी गवाही के लिए पेश नहीं होते। यह दोनों के बीच अपवित्र रिश्ता प्रतीत होता है। ऐसा लगता है कि गवाही के लिए पेश न होने वाले अधिकारियों को अपने वरिष्ठों की शह मिली है। हाईकोर्ट ने कहा कि अब सरकार को जागने और पुलिस को व्यवस्थित करने की जरूरत है।