दोनों अधिकारियों ने सरकारी खातों के संचालन और उच्च मूल्य के डेबिट लेनदेन के दौरान बैंकिंग प्रक्रियाओं का कथित दुरुपयोग किया। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर, गलत मोबाइल नंबर और फर्जी कॉल-बैक सत्यापन के आधार पर सरकारी खातों से बड़ी रकम शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई।
हरियाणा के सरकारी विभागों के बैंक खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में दो बैंक अधिकारियों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। सीबीआई ने तीन दिन का ही रिमांड मांगा था।
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आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम अहमद डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर/ऑथराइजर चरणजीत सिंह रंधावा शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने सरकारी खातों के संचालन और उच्च मूल्य के डेबिट लेनदेन के दौरान बैंकिंग प्रक्रियाओं का कथित दुरुपयोग किया। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर, गलत मोबाइल नंबर और फर्जी कॉल-बैक सत्यापन के आधार पर सरकारी खातों से बड़ी रकम शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई।
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जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ मामलों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की मंजूरी बैंक अधिकारियों की भूमिका के बिना संभव नहीं थी। उनके मोबाइल से अहम डिजिटल साक्ष्य और चैट डिलीट किए जाने की आशंका है। एजेंसी ने सह-आरोपियों से आमना-सामना, डिजिटल साक्ष्य की बरामदगी, धन के प्रवाह का पता लगाने और अन्य लाभार्थियों की पहचान के लिए तीन दिन की पुलिस रिमांड आवश्यक बताई है।