-कंपनियों ने दरें घटाने से किया इनकार, सरकार ने अधिक लागत का हवाला देकर लिया फैसला टेंडर की शर्तें बदलकर दोबारा मांगी जाएंगी निविदाएं
- एक तरफ स्वदेश दर्शन 2.0 के प्रोजेक्ट अधर में, दूसरी तरफ काजियाना में 1996 में अधिग्रहीत जमीन पर 30 साल बाद भी पर्यटन केंद्र का अता-पता नहीं
दीपक शाही
पंचकूला। जिले को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की योजना को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत पिंजौर के ऐतिहासिक यादवेंद्र गार्डन के जीर्णोद्धार और मोरनी के टिक्कर ताल को एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के टेंडर रद्द कर दिए गए हैं। दोनों परियोजनाओं की अनुमानित लागत 76.98 करोड़ रुपये है। कंपनियों की दरें अधिक मानते हुए सरकार ने नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित करने का फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में 7 सितंबर 2026 को हरियाणा निवास में हुई हाई पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बातचीत के बावजूद कंपनियां दरें और कम करने को तैयार नहीं हुईं।
कंपनियों ने नहीं घटाईं दरें, दोबारा होगी टेंडर प्रक्रिया
टिक्कर ताल परियोजना की अनुमानित लागत 21.52 करोड़ रुपये थी। एल-1 बोलीदाता इनोवेटिवव्यू टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और पैवेलियन एंड इंटीरियर्स के कंसोर्टियम ने 20.70 करोड़ रुपये की दर दी थी। यादवेंद्र गार्डन के जीर्णोद्धार की अनुमानित लागत 55.46 करोड़ रुपये थी। इसके लिए एल-1 बोलीदाता ने 54 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। दोनों मामलों में दरें अनुमानित लागत से कम होने के बावजूद कंपनियों से अपेक्षित कटौती नहीं हुई और टेंडर रद्द कर दिए गए।
शर्तों में बदलाव से बढ़ाएंगे प्रतिस्पर्धा
बैठक में माना गया कि गुणवत्ता एवं कम लागत आधारित चयन की शर्तों के कारण प्रतिस्पर्धा सीमित रही। पर्यटन विभाग को निविदा दस्तावेजों और समान कार्यों की परिभाषा में संशोधन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक एजेंसियां भाग ले सकें और लागत कम हो। बैठक में पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
काजियाना में 30 साल बाद भी पर्यटन केंद्र का इंतजार
एक तरफ नई पर्यटन परियोजनाएं अटक गई हैं, वहीं पिंजौर ब्लॉक के गांव काजियाना में पर्यटन केंद्र विकसित करने की योजना भी तीन दशक से अधर में है। जनवरी 1996 में इसके लिए जमीन अधिग्रहीत की गई थी, लेकिन अब तक ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।
पंचकूला के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बंसल ने आरटीआई के जरिए जमीन के उपयोग और परियोजना में देरी की जानकारी मांगी थी। आरोप है कि स्पष्ट जवाब देने के बजाय आवेदन पिंजौर के डीडीओ कार्यालय को स्थानांतरित कर दिया गया। ऐसे में पर्यटन विकास की योजनाओं को जमीन पर उतारने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।