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पंजाब में चक्का जामः सड़कों पर उतरे किसान, तीन घंटे थामी पहियों की रफ्तार

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चंडीगढ़। कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के शनिवार को देशव्यापी चक्का जाम का पंजाब में खासा असर रहा। पूर्व घोषित चक्का जाम दोपहर 12 से 3 बजे तक रहा। इस दौरान सूबे के 46 नेशनल और स्टेट हाईवे पर वाहनों के पहियों की रफ्तार थमी रही। किसानों के चक्का जाम को कर्मचारियों और राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया। हालांकि भाजपा अलग रही। सड़कों पर उतरे किसानों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि कृषि कानूनों के वापस नहीं होने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
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किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ किसान, स्थानीय लोग, कर्मचारी और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता चक्का जाम में शामिल हुए। पंजाब में 29 राष्ट्रीय राजमार्ग और 17 स्टेट राजमार्ग पर किसानों ने जगह-जगह चक्का जाम किया। मार्गों पर पड़ने वाले टोल प्लाजा पर भी किसान एकत्र हुए और उन्होंने वाहनों के पहियों की रफ्तार को रोक दिया। तीन घंटे तक यातायात पूरी तरह से ठप रहा। तीन बजे किसानों ने चक्का जाम समाप्त करने की घोषणा की, जिसके बाद ही यातायात बहाल हो पाया। किसानों के आक्रोश और चक्का जाम को मिले समर्थन को देखते हुए सूबे के सभी जिलों के सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा कर दी गई थी। किसानों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि जाम के दौरान एंबुलेंस, सेना, पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को वे नहीं रोकेंगे।
पंजाब में किसानों चक्का जाम को भारतीय जनता पार्टी ने समर्थन नहीं दिया। अन्य राजनीतिक दल सत्तासीन कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता चक्का जाम में शामिल हुए। नेताओं ने कहा कि किसानों की मांगें जब तक पूरी नहीं हो जातीं, उनका समर्थन ऐसे ही जारी रहेगा।
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भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) ने शनिवार को 15 जिलों में 33 स्थानों पर 12 बजे से 3 बजे तक धरना दिया। महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि इनमें से 13 स्थानों पर 139 दिनों से स्थायी धरना चल रहा है। सभी स्थानों पर लगभग 2.5 लाख किसान, मजदूर, युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। धरने पर बैठे किसानों ने कृषि कानूनों, बिजली बिल 2020 और स्ट्रॉ अध्यादेश को निरस्त करने की मांग की। धरना स्थलों पर प्रदेश उपाध्यक्ष जनक सिंह भूटल, सचिव हरदीप सिंह तलावले, सुखजीत सिंह कोठागुरु, राम सिंह भनीबाग, जगतार सिंह कालाजार, सुनील कुमार भोदीपुरा, हरजिंदर सिंह बुग्गी, गुरमीत सिंह किशनपुरा, जसपाल सिंह नांगल और बलवंत सिंह घुडनी शामिल हुए।
पूरे देश में किसानों के चक्का जाम की सफलता से यह साबित हो गया है कि किसानों की मांग जायज हैं। इस चक्का जाम में आम लोगों के साथ ही कर्मचारी और कई संगठनों ने समर्थन दिया। अब किसानों का आंदोलन एक बार फिर तेजी पकड़ गया है। केंद्र को अपने अड़ियल रुख को बदलकर उनकी मांगों को मानना ही होगा।
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- सुखदेव सिंह कोकरी कलां, महासचिव, भाकियू, एकता (उगराहां)
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