रायपुररानी। रायपुररानी में बीडीसी व चेयरमैन के चुनाव के दौरान बीडीपीओ कार्यालय में जमकर खींचतान हुई। चुनाव प्रक्रिया में देरी के चलते विवाद तब उत्पन्न हुआ जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट डीडीपीओ विकास पराशर समय पर बैठक में नहीं पहुंचे।
उपायुक्त मोनिका गुप्ता ने सभी बीडीसी सदस्यों को सुबह 11 बजे तक कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया था, लेकिन डीडीपीओ 12:15 बजे पहुंचे, जिससे चुनाव प्रक्रिया में देरी हुई।
चुनाव प्रक्रिया एक बंद कमरे में चल रही थी, जिसमें डीडीपीओ, बीडीसी चेयरमैन और अन्य सदस्य मौजूद थे। इस दौरान बीडीसी सदस्य माम राज ने रजनी देवी का नाम प्रस्तावित किया। अचानक बीडीसी सदस्य मनोज राणा ने पूर्व वाइस चेयरमैन हरप्रीत कौर का नाम समर्थन किया, जिसे रीटा वर्मा और अन्य सदस्यों ने भी समर्थन दिया। इसके चलते विवाद और बढ़ गया।
इस बीच, कुछ सदस्य अचानक कमरे से बाहर चले गए, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। थोड़ी देर बाद सात बीडीसी सदस्य वापस लौटे, तब डीडीपीओ ने चुनाव प्रक्रिया में दो तिहाई सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य बताई।
चुनाव के दौरान डीडीपीओ को फोन पर बात करते देखा गया। लेकिन थोड़ी देर बाद वे बिना किसी को सूचित किए चुनाव प्रक्रिया अधूरी छोड़कर गाड़ी में बैठकर निकल गए। इस घटना से बीडीसी सदस्यों के बीच नाराजगी और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
चुनाव प्रक्रिया की अधूरी स्थिति ने प्रशासनिक ढिलाई और चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।
कांग्रेस समर्थित हरप्रीत कौर को दोबारा वाइस चेयरमैन बनाने पर बदल गया था माहौल
बता दे कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस समर्थित हरप्रीत कौर को दोबारा वाइस चेयरमैन बनाने के लिए सात सदस्य पक्षधर हो गए थे जिसके बाद चुनाव में बैठे भाजपा समर्थित सदस्य बाहर आ गए व चुनावी प्रक्रिया में अड़चनें आनी शुरू हो गई।
सतबीर राणा की कुर्सी को भी खतरा
मंगलवार को हुए इस चुनावी प्रक्रिया में जिस तरह से वाइस चेयरमैन कांग्रेस समर्थित बनाने की तैयारियां चल रही थी इससे यही साबित होता है कि मौजूदा चेयरमैन सतबीर राणा की कुर्सी भी खतरे में आ सकती है।
कुछ सदस्यों ने पहले अविश्वास प्रस्ताव में वाइस चेयरमैन हरप्रीत कौर की खिलाफ वोट दिया था। लेकन सूत्रों की माने तो इस बार ये सदस्य हरप्रीत कौर के पक्ष में वोटिंग के लिए तैयार थे।