अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने तनाव-संबंधी समस्याओं का इलाज मुख्यमंत्री सेहत योजना में शामिल कर लिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के इलाज में देरी घातक हो सकती है इसलिए प्राथमिकता पर इलाज जरूरी है।
तनाव-संबंधी समस्याएं केवल रोजमर्रा के आम तनाव तक सीमित नहीं होतीं। इनमें चिंता, डर, बेचैनी और शारीरिक लक्षणों के गंभीर रूप शामिल हैं, जो व्यक्ति के रोजाना जीवन को प्रभावित करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के बराबर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आर्थिक रुकावटों के कारण लोग इलाज से वंचित न रहें, यही सरकार का उद्देश्य है।
यह फैसला 18 से 45 साल के आयु वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है। इस उम्र में कॅरिअर बनाने, रिश्ते संभालने और जिम्मेदारियां निभाने के कारण तनाव का खतरा अधिक होता है।