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‘जिला कष्ट निवारण समिति को गुमराह कर रहे शिकायतकर्ता’ इंडियन होटल के मालिक ने समिति सदस्य समेत तीन को भेजा नोटिस

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पंचकूला। जिला संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में झूठी शिकायत देने के मामले को सेक्टर-21 स्थित इंडियन होटल के मालिक बलबीर पाल दंदयान ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले में कष्ट निवारण समिति के सदस्य बीबी सिंघल समेत झूठी शिकायत करने वाले तीन लोगों को लीगल नोटिस भेजा है। इतना ही नहीं उन्होंने हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता से शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोची समझी साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि, उन्हें कोर्ट, विजिलेंस और कष्ट निवारण समिति से कब्जे के मामले में क्लीन चिट मिल चुकी है।
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शुक्रवार को सेक्टर-10 में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बलबीर पाल दंदयान ने कहा कि 28 जून को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में जिला संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की मीटिंग हुई थी, जिसमें बीबी सिंघल और शिकायतकर्ता सतीश गर्ग, संदीप सभ्रवाल ने सेक्टर-21 स्थित होटल इंडियन पैलेस के मुद्दे पर बहस की थी, जबकि उनका आरोपियों के साथ संपत्ति को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। इतना ही नहीं उन्होंने एक मामले में मानहानि का केस भी किया हुआ है।
बलबीर पाल ने बताया कि साल 2016 में उनके होटल की शिकायत कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में मंत्री कविता जैन से की गई थी। इस मामले को गंभीरता से लेकर उन्होंने एक विशेष कमेटी का गठन किया था, जिसमें समिति के सदस्य बीबी सिंघल को निष्पक्ष जांच के लिए शामिल किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा 13 बिंदुओं पर आरोप लगाए गए थे। जिसमें से बिंदु नंबर-4 होटल मालिक द्वारा गांव की फिरनी पर सात फुट तक कब्जा करने का लगाया था। जबकि उस कब्जे को सन 1999 में स्वयं हटा लिया था। इसकी लिखित सूचना पंचायत को दे दी थी। इसके बाद सन 2001 में पंचकूला में नगर परिषद का गठन किया गया, लेकिन उसने अपना रिकॉर्ड ठीक नहीं किया और 26 जुलाई 2007 को एसडीएम कोर्ट में उनके गलत पते पर केस कर दिया। केस में उनका पता सेक्टर-12 मकान नंबर-283 लिखा गया, जोकि कहीं पर मौजूद नहीं था।
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उन्होंने बताया कि उस समय वह सेक्टर-6 मकान नंबर-179 में रहते थे। इस कारण उन्हें केस की जानकारी नहीं मिली और 2010 में वह एक्स पार्टी हो गए। इस पूरे मामले की जानकारी उन्हें 2016 में कष्ट निवारण समिति के जरिए मिली। उन्होंने आरटीआई के जरिए कागजात हासिल किए। बलबीर पाल ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखकर सूचित किया कि वह कब्जा सन 1999 में ही हटा लिया था, लेकिन निगम ने फिर भी सरकारी रिकॉर्ड को ठीक नहीं किया। फरवरी 2017 में निगम ने गलत पते पर एसडीएम कोर्ट में एग्जीक्यूशन डाल दी।
इस केस का उन्होंने सामना किया सारे कागजात पेश किए, जबकि निगम दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। इसके बाद उन्होंने डिग्री के लिए 2017 में कोर्ट में केस किया, जिसका फैसला 06 सिंतबर 2018 में आया था। कोर्ट के फैसले में लिखा था कि उक्त जगह पर उनका कोई कब्जा नहीं है और होटल अपनी जगह पर बना हु्आ है। इतना ही नहीं कोर्ट ने सरकार को अपना रिकॉर्ड ठीक करने की हिदायत दी थी। लेकिन, निगम ने इस आदेश के बाद भी रिकॉर्ड को ठीक नहीं किया। इस संबंध में एक केस कोर्ट में विचाराधीन है।
सरकारी जमीन पर कब्जा मिला तो एक करोड़ दूंगा
बलबीर पाल ने हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि वह एक सामाजिक व्यक्ति हैं। वह शहर के गणमान्य व्यक्तियों के साथ इस मामले में एक मीटिंग कर लें। यदि सरकारी जमीन पर उनका कब्जा मिलता है तो वह स्वयं कब्जे को हटा लेंगे और एक करोड़ रुपया जिला रेडक्रॉस सोसायटी को दान में देंगे। जिसे वह शहर की भलाई के लिए किसी भी कार्य में लगा सकते हैं। यदि शिकायत गलत मिलती है तो सख्त कार्रवाई करें।
बलबीर पाल का आज भी कब्जा: सभ्रवाल
संदीप सभ्रवाल और सतीश गर्ग ने कब्जे को हटाने के लिए मेयर कुलभूषण गोयल से मुलाकात की। मेयर ने उन्हें आश्वासन दिया कि जो भी कार्रवाई बनती होगी उसे वह अवश्य करेंगे। उन्होंने इसके लिए लिखित में शिकायत देने की बात कही है। संदीप सभ्रवाल और सतीश गर्ग ने कहा कि बलबीर पाल का आज भी फिरनी पर सात फुट अवैध कब्जा है। जिसे वह निगम अधिकारियों से मिलकर जायज ठहराना चाहते हैं। उनके पास खसरा नंबर-79 जहां पर होटल बना है वह अवैध कब्जा है। होटल की रजिस्ट्री पूरी नहीं है। होटल 2006 में बना है। संदीप सभ्रवाल का आरोप है कि बलबीर पाल झूठ बोल रहे हैं कि उन्होंने 1999 में कब्जा खाली कर दिया था, जबकि 24 सिंतबर 2002 में विभागों को लिखित में सूचित किया था की कब्जा है। उन कागजों पर हस्ताक्षर भी है। उन्होंने बताया कि अदालत ने 14 जून 2010 को इस कब्जों को हटाने का आदेश दिया था, जोकि आज तक नहीं हटा। उन्होंने आरोप लगाया कि बलबीर पाल ने कार्रवाई से बचने के लिए निगम अधिकारियों के साथ मिलकर जाली कागजात बनवाकर अदालत में लगाए, जिसका पूरा रिकार्ड उनके पास है। वह बार-बार विभागों को केस नंबर-803/2017 का फैसला दिखाकर गुमराह कर रहे हैं। जबकि, फैसले में सिर्फ इतना है कि होटल का रिकार्ड पूरा किया जाए, जो कभी नहीं हो सकता है। क्योंकि होटल की रजिस्ट्री पूरी नहीं है।
समिति के सामने शिकायत आई है, जांच बाकी है
कब्जे की शिकायत जिला कष्ट निवारण समिति से की गई है। यह मामला 2016 में भी समिति के सामने आया था, जिसकी जानकारी दी समिति को दी है। अभी कमेटी का गठन हुआ है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं। कमेटी दोनों पक्षों को गंभीरता से सुनेंगी। इसके बाद कोई निर्णय लेगी। यदि किसी बरबीर पाल ने किसी तरह का वायलेंस नहीं कर रखा है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि भाजपा सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं करती है। 2016 के बाद इस मामले में क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है।
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बीबी सिंघल, सदस्य जिला संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति।
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