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विदुरानी की प्रेम गाथा निश्छल भक्ति का प्रतीक: स्वामी राम दास

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पंचकूला। सेक्टर-10 स्थित सनातन धर्म मंदिर में चल रहे वार्षिक मूर्ति स्थापना उत्सव के तहत भागवत कथा के दूसरे दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा वाचन करते हुए स्वामी राम जी दास वशिष्ठ ने कहा कि विदुरानी और श्रीकृष्ण की प्रेम गाथा सच्ची और निश्छल भक्ति का प्रतीक है। जब श्रीकृष्ण हस्तिनापुर पहुंचे तो उन्होंने दुर्योधन का शाही भोजन ठुकरा दिया और विदुर की कुटिया में गए। प्रेम में भावविभोर विदुरानी ने छिलके परोस दिए, जिन्हें भगवान ने प्रेमपूर्वक स्वीकार किया। स्वामी ने कहा कि इससे सिद्ध होता है कि कृष्ण केवल भाव और भक्ति के भूखे हैं।
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स्वामी ने विदुर के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि धृतराष्ट्र द्वारा अपमानित किए जाने के बाद विदुर ने हस्तिनापुर त्याग दिया और अंत में ईश्वर भक्ति में लीन हो गए।
भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर अधर्म का नाश किया
भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर प्रह्लाद की रक्षा की और अधर्म का नाश किया। ध्रुव की अटूट भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि दृढ़ विश्वास और तपस्या से ध्रुव को अमर स्थान मिला। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और अंत में प्रसाद और भंडारे का आयोजन किया गया।
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