चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन में मिग-21 के अंतिम उड़ान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। वायुसेना अध्यक्ष एपी सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व वायुसेना अफसर भावुक होकर उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक विदाई से वायुसेना में गर्व और nostalgia की लहर दौड़ गई।
चंडीगढ़।
एयरफोर्स स्टेशन चंडीगढ़ की जमीन और आसमान शुक्रवार को एक ऐतिहासिक व शौर्य से भरे पल के गवाह बने। मौका था भारतीय वायुसेना के पहले सुपरसोनिक लड़ाकू विमान मिग-21 को विदाई देने का। छह दशक तक वायुसेना की सेवा करने के बाद शुक्रवार को इसे यादगार ढंग से अलविदा कहा गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान, वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी व नौसेनाध्यक्ष एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी मुख्य रूप से मिग-21 को विदाई देने पहुंचे। देश के विभिन्न राज्यों से चंडीगढ़ पहुंचे भारतीय वायुसेना के वे पूर्व अफसर भी इस गौरवशाली पलों के साक्षी बने जिन्होंने कई हजार घंटे इस विमान के साथ फ्लाइंग की। आसमान में अपनी गर्जना से दुश्मन को थर्राने और कई बार उसे धूल चटाने वाले मिग-21 की विदाई देखने के दौरान ये वेटरन भावुक दिखे। मिग की अलविदा उड़ान देखते वक्त उनकी आंखों में चमक और चेहरे पर उत्साह की अनोखी झलक थी।
अब हर कोई मिग की अंतिम उड़ान देखने को उत्सुक था। अंतत: इंतजार खत्म हुआ और बादल फाॅर्मेशन में मिग-21 ने एंट्री की। इसी फाॅर्मेशन में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, ग्रुप कैप्टन मोहित गुप्ता और एयर कमोडोर अमित शामिल रहे। वायुसेना अध्यक्ष एपी सिंह ने मिग-21 के टेल नंबर 2777 विमान के साथ अपनी अंतिम उड़ान भरी और इस शानदार फ्लाइंग के बाद उनके चेहरे पर भी संतोषजनक खुशी थी। इसी दाैरान एयरफोर्स की सातवीं महिला फाइटर जेट पायलट स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा भी अपने तीन अन्य पायलट साथियों के साथ पैंथर्स फाॅर्मेशन में चार मिग-21 लेकर आसमान में पहुंच गईं। सभी पायलट यह दिखा रहे थे कि मिग-21 के साथ उनकी यह ऐतिहासिक उड़ान आज आसमान से भी ऊंची है। उधर दर्शक दीर्घा में मौजूद पूर्व वायुवीरों की तालियाें की गड़गड़ाहट यह बता रही थी कि आसमान में आखिरी बार गरजते अपने मित्र टाइगर को वे जोशीले अंदाज में विदाई दे रहे हैं।