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Panchkula News: जांच रिपोर्ट में गुनाह साबित, फिर भी 2 साल से कार्रवाई का इंतजार

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पंचकूला। सरकारी सिस्टम में फाइलें किस कदर कछुआ चाल चलती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण वन विभाग की मोरनी मंडल के आसरेवाली जंगल की रिपोर्ट है। जांच कमेटी ने मौके पर जाकर 383 पेड़ों के अवैध कटान की पुष्टि कर दी, रेंजर से लेकर गार्ड तक की लापरवाही उजागर हो गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2024 में आई इस जांच रिपोर्ट पर 2026 तक कोई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि वर्ष 2024 में जिस अधिकारी ने बतौर जांच अधिकारी इस घोटाले का पर्दाफाश किया था, आज 2026 में वही अधिकारी पंचकूला के वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) के पद पर तैनात हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जो दोषी कल उनकी जांच में गुनहगार थे, वे आज उनके डीएफओ रहते हुए आजाद कैसे घूम रहे हैं।
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आसरेवाली जंगल में हुए 383 पेड़ों के अवैध कटान मामले में एक और चौंकाने वाला गणित सामने आया है। जांच रिपोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि 1 अप्रैल 2021 से 30 अप्रैल 2024 के बीच, यानी कुल 1125 दिनों तक जंगल में माफिया का राज रहा और हर तीसरे दिन एक हरे पेड़ पर कुल्हाड़ी चली। विडंबना देखिए कि इस पूरे कार्यकाल के दौरान तैनात जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं।

दो टीमों की जांच में हुआ था खुलासा
शिकायत मिलने के बाद डीएफओ ने 27 अप्रैल 2024 को दो विशेष टीमों (ए और बी) का गठन किया था। जांच अधिकारी विजय नेहरा और दिनेश पातलान के नेतृत्व में इन टीमों ने आसरेवाली जंगल की खाक छानी। जांच की रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। टीम ए को 307 ठूंठ मिले, जिनमें से 98 बिल्कुल ताजा कटान के थे। वहीं टीम बी को 273 ठूंठ मिले, जिनमें 80 नए थे। कुल मिलाकर 580 पेड़ों को काटकर ठिकाने लगा दिया गया, जिनमें से 178 पेड़ों का कटान तो बिल्कुल हालिया था।
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रडॉर पर फील्ड स्टाफ
डीएफओ द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में स्पष्ट पूछा गया है कि जब टीम-ए और टीम-बी को मौके पर इतनी बड़ी संख्या में नई और पुरानी मुढिया मिलीं, तो उस समय तैनात रेंजर और गार्ड को यह नजर क्यों नहीं आईं? क्या यह केवल लापरवाही है या लकड़ी माफिया को दिया गया मौन समर्थन। तत्कालीन वन राजिक अधिकारी ने दो साल बाद भी जवाब नहीं दिया और ना ही डीएफओ ने रिमांइडर दिया। सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी हासिल की गई जिसमें यह खुलासा हुआ है।

मार्च में ही खुल जाती पोल, पुराने पेड़ों की जांच नहीं होने दी....
मोरनी के आसरेवाली में 1 मार्च 2026 को जांच एव मुल्यांकन टीम द्वारा 1138 नए पेड़ों के कटान का मामला उजागर किया गया था। इसमें 14 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। वह जेल भी गए। इस मामले में कई वन अधिकारी और कर्मचारी सस्पेंड हुए। अगर उस समय पुराने पेड़ों का जांच भी हो गया होता, तो 2024 के मामले भी उजागर हो जाते, लेकिन ऐसा होने नहीं दिया गया।
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कोट
मोरनी मंडल के आसरेवाली में साल 2024 में कटे पेड़ों के मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। केसी मीना, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग हरियाणा।
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