लुधियाना में हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर अगस्त 2025 में दर्ज की गई थी। पुलिस के पेश किए चालान में 19 सितंबर 2025 को एक गवाह का बयान संलग्न है जिसकी मृत्यु 29 मई 2025 को हो चुकी थी।
हत्या से जुड़े एक मामले में दाखिल किए गए चालान में मर चुके व्यक्ति का उसकी मौत के महीनों बाद दर्ज किए गए बयान ने पंजाब पुलिस को मुसीबत में डाल दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न केवल हमें स्तब्ध कर दिया बल्कि जांच की विश्वसनीयता पर भी गहरी चोट पहुंचाई है।
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कोर्ट ने एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर का हलफनामा तलब किया है और सीबीआई जांच का विकल्प खुला रहने की चेतावनी भी दी है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पुलिस ने चालान में एक ऐसे व्यक्ति का बयान शामिल कर दिया जिसकी मृत्यु कथित बयान दर्ज होने की तारीख से लगभग चार महीने पहले ही हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने मामले को साधारण प्रक्रियागत त्रुटि मानने से इन्कार करते हुए पूछा कि आखिर एक मृत व्यक्ति पुलिस रिकाॅर्ड में बाद में बयान कैसे दे सकता है। जस्टिस सुमित गोयल ने इस घटनाक्रम को अस्पष्ट, अकल्पनीय और न्यायिक चेतना को झकझोरने वाला बताते हुए कहा कि यदि रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया सही है तो यह मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं माना जा सकता।
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एफआईआर अगस्त 2025 में लुधियाना में हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। कोर्ट के समक्ष आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पुलिस के पेश किए चालान में 19 सितंबर 2025 की तारीख का एक गवाह बयान संलग्न है जबकि उसी गवाह की मृत्यु 29 मई 2025 को हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी को अगली सुनवाई पर केस डायरी सहित व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य पुलिस संतोषजनक और विश्वसनीय जवाब देने में विफल रहती है, तो मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का विकल्प भी खुला है।