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Panchkula News: किसानों के बिना सहमति के सरकार ने बनाई नई लैंड पूलिंग पॉलिसी

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार के लुधियाना में 24,311 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने का स्थानीय किसान लगातार विरोध कर रहे हैं। इसी कड़ी में लुधियाना में जिस जगह पर ये हजारों एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है, वहां के 32 गांवों के पंच, सरपंच, पूर्व पंच व सरपंच शनिवार को चंडीगढ़ पहुंचे।
चंडीगढ़ के सेक्टर-27 में मीडिया से बातचीत के दौरान इन 32 गांवों के नुमाइंदों ने कहा कि सरकार ने जो नई लैंड पूलिंग पॉलिसी बनाई है, उस पर किसानों से सहमति नहीं ली गई। नई पॉलिसी में किसानों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया। इन नुमाइंदों में शामिल बलविंदर सिंह ने कहा कि नई लैंड पूलिंग पॉलिसी में सरकार ने जमीन अधिग्रहण के बदले तीन साल के बाद किसान को जगह डेवलप करके देने की बात कही है। इसी कड़ी में 11 जून को पीड़ित गांव जोधां में 32 गांवों के प्रतिनिधियों की बैठक करके इस नीति का विरोध किया था।
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अब 16 जून को गलाडा के सामने उपचुनाव क्षेत्र में सांकेतिक प्रदर्शन रखा गया है। इन 32 गांवों के नुमाइंदों ने सरकार को नई लैंड पूलिंग पॉलिसी को रद्द करने की मांग की। इस दौरान लुधियाना जिले के पीड़ित गांवों द्वारा बनाई गई काम बचाओ, खेत बचाओ, पिंड बचाओ एक्शन कमेटी की ओर से तरसेम जोधां (पूर्व विधायक), बलविंदर सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता), प्रकाश सिंह (सरपंच, जोधां), जगदेव सिंह (पूर्व सरपंच, जोधां), जसवंत सिंह घोली (मार्केट प्रधान, जोधां), मनरेगा आंदोलन के नेता लखवीर सिंह रूपालड़ी और बलविंदर सिंह काला (झाड़ साहिब) मौजूद थे।
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पुडा और गलाडा की कई कॉलोनी व प्रोजेक्ट बेकार हो गए
कमेटी के नुमाइंदों ने कहा कि पंजाब पुडा और गलाडा द्वारा विभिन्न शहरों के बाहरी इलाकों में कॉलोनियों और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए हजारों एकड़ जमीन बेकार पड़ी है। उपजाऊ जमीन में कांग्रेस घास उग आई है। पंजाब में 50 हजार से अधिक बनी कॉलोनियों में आधे प्लॉट खाली पड़े हैं और उनमें बुनियादी सुविधाओं की कमी है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार जो 14 हजार अवैध कॉलोनियां हैं, सरकार यह जानकारी दे कि उन्हें किस आधार पर छोड़ रही है। सरकार को यह नीति लाने से पहले गांव वालों और भूमि मालिकों से संवाद करना चाहिए था।
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