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हाईकोर्ट की टिप्पणी: 16 हजार 890 रुपये की रिकवरी के लिए रिटायर कर्मी से 14 साल लड़ी पंजाब सरकार, निंदनीय

Mon, 27 Apr 2026 10:36 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मामला एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से जुड़ी छोटी सी राशि का था। कर्मचारी को 1999 में 24 साल की सेवा पूरी करने पर एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन का लाभ मिला था लेकिन अक्तूबर 2007 में रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों के बाद यह लाभ वापस ले लिया गया। वेतन घटाया गया और रिटायरमेंट लाभों से रिकवरी कर ली गई।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महज 16 हजार 890 रुपये की रिकवरी के लिए राज्य सरकार ने करीब 14 साल तक मुकदमा जारी रखा। हैरानी की बात है कि राज्य इस मामूली राशि के लिए मुकदमा लड़ रहा है। कर्मचारी अब करीब 75 साल का है और जीवन के अंतिम पड़ाव में उसे कोर्ट तक घसीटा गया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के रवैए की निंदा करते हुए यह टिप्पणियां की हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य न्याय दिलाना होता है लेकिन कई बार यही व्यवस्था प्रक्रिया के बोझ तले अपना मूल उद्देश्य खो देती है। मामला एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से जुड़ी छोटी सी राशि का था। कर्मचारी को 1999 में 24 साल की सेवा पूरी करने पर एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन का लाभ मिला था लेकिन अक्तूबर 2007 में रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों के बाद यह लाभ वापस ले लिया गया। वेतन घटाया गया और रिटायरमेंट लाभों से रिकवरी कर ली गई।

इस फैसले से आहत कर्मचारी ने पंजाब रोडवेज वर्कर्स यूनियन के माध्यम से औद्योगिक विवाद उठाया। मामले की सुनवाई करने वाले ट्रिब्यूनल ने रिकवरी को अवैध ठहराते हुए रकम लौटाने के आदेश दे दिए। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए 2012 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि मुद्दा राशि का नहीं, बल्कि अनुपात और विवेक का है। यह मामला राज्य की मुकदमेबाजी प्रणाली में मौजूद संरचनात्मक खामियों को उजागर करता है। 

पंजाब की विवाद निपटान एवं मुकदमेबाजी नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि छोटे वित्तीय मामलों, गैर नजीर वाले मामलों और व्यक्तिगत सेवा विवादों में अपील से बचा जाए। इसके बावजूद यह केस विभागों, समितियों और अधिकारियों की कई स्तर की जांच पार करता हुआ हाईकोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट की टिप्पणी के बाद राज्य ने अपनी याचिका वापस ले ली।
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