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Panchkula News: मुख्यमंत्री ने जिस गोशाला में गोवंश अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया उसी गोशाला को अवैध कब्जाध बता कर गौशाला को खाली करने का नगर परिषद ने दिया नोटिस

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पिंजौर। नगर पालिका पिंजौर ने 16 सितंबर, 2005 को प्रस्ताव पास कर कौशल्या नदी किनारे गोशाला के लिए जमीन दी थी, जिससे संरक्षित पशुओं विशेषकर दुर्घटनाग्रस्त बीमार गोवंश का इलाज हो सके। लेकिन तीन साल पहले गठित हुई नगर परिषद कालका-पिंजौर के कार्यकारी अधिकारी ने गोशाला को नोटिस भेजकर इसे अवैध कब्जा बताकर जमीन खाली करने का आदेश दिया है। इससे विवाद बढ़ गया है और गौ सेवक भी नगर परिषद की इस कार्यवाही से भड़के हुए हैं। कामधेनु गोशाला सेवा सदन संरक्षक विजय बंसल ने नगर परिषद द्वारा भेजे गए नोटिस को असंवैधानिक बताते हुए मुख्यमंत्री, स्थानीय शहरी निकाय मंत्री और अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी निकाय विभाग को ज्ञापन भेजकर इस नोटिस को तुरंत रद्द करने और जमीन गोशाला के नाम करने के साथ नोटिस भेजने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
विजय बंसल ने बताया कि कौशल्या डैम के पास 18 वर्षों से समाजसेवी कामधेनु गोशाला सेवा सदन के नाम से यहां पर करीब 1100 गायों की देखभाल कर रहे हैं और उनके खाने-पीने का भी प्रबंध कर रहे हैं, साथ ही नगर निगम और नगर परिषद द्वारा भेजे गए घायल और बीमार गोवंशों का भी खुद इलाज करवा रहे हैं। नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी ने 18 अगस्त को गोशाला को नोटिस भेजकर निर्देश दिए हैं कि गोशाला ने नगर परिषद की भूमि और गली पर कब्जा कर टिन का शेड बना रखा है। जिसे सात दिन में हटाया जाए। अगर गोशाला के पास कोई दस्तावेज है तो पेश करें, नहीं तो नोटिस की समयावधि के बाद हरियाणा नगर पालिका अधिनियम-1973 की धारा-181 के तहत एक तरफा कार्रवाई की जाएगी, इसका खर्चा भी गोशाला सेवा सदन को देना होगा।
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उपमुख्यमंत्री ने किया था उद्घाटन, विस अध्यक्ष 11 और सांसद दे चुके हैं 5 लाख का अनुदान
वर्ष-2005 में प्रस्ताव पारित होने के बाद यहां गोशाला आरंभ हुई थी और वर्ष 2006 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने इसका उद्घाटन कर अपने कोष से शेड निर्माण के लिए दो लाख रुपये की अनुदान राशि दी थी। इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने भी चहारदीवारी निर्माण के लिए गोशाला को ढाई लाख रुपये की अनुदान राशि दी थी। वहीं, नवंबर, 2021 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिंजौर की गोशाला में गौ सेवा आयोग की ओर से स्थापित किए गए गोवंश अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया था और गोशाला चलाने के लिए 21 लाख रुपये अनुदान भी दिया था। अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का उद्देश्य था कि केंद्र में गाय के गोबर से खाद, उपले, पेंट, गमले, दिये आदि अन्य उत्पाद बनाकर इस गोशाला को आत्मनिर्भर बनाया जाए। हरियाणा विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने अपने कोष से इसी गोशाला को 11 लाख और सांसद रतनलाल कटारिया ने 5 लाख रुपये का अनुदान दिया था। इतना ही नहीं राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 2017-18 की जमाबंदी में भी जमीन गोशाला के नाम पर है।
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नगर परिषद बना रही बंद करने का दबाव
एडवोकेट विजय बंसल ने कहा कि एक ओर तो भाजपा गोवंश के संरक्षण और गोवंशों की सुरक्षा का दावा करती है। कैबिनेट में प्रस्ताव पास कर प्रदेश में अधिक गोशालाएं खोलने के लिए जमीनें भी दे रही हैं, लेकिन दूसरी ओर नगर परिषद कालका डरा-धमकाकर गोशाला कमेटी पर दबाव बनाकर इसको ही खत्म कर रही है। बंसल ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में बताया कि यहां कूड़े का डंपिंग ग्राउंड बनाने से कौशल्या नदी किनारे पर केवल गोशाला के गोवंश को खतरा होगा। इतना ही नहीं यहां पिंजौर को जलापूर्ति करने वाला ट्यूबवेल है, आसपास लोगों के आवास बने हैं और यहां के कौशल्या डैम का पानी पंचकूला के सेक्टरों को सप्लाई किया जाता है। यहां डंपिंग ग्राउंड बनने से बड़ी आबादी को जानलेवा नुकसान हो सकता है। इसलिए नोटिस को तुरंत रद्द कर जमीन गोशाला के नाम करने और नोटिस भेजने वाले अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्यवाही की जाए।
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