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Panchkula News: मोहब्बत दिवानगी बनी, दिवानगी जुनून जिसको समेटे दर-दर भटकता था मजनू

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पंचकूला। मोहब्बत दिवानगी बनी और दिवानगी जुनूं जिसको समेटे दर-दर भटकता था मजनू। जमाने ने ताना दिया और बदनाम किया। वाह रे आसमां वाले-तूने क्या-क्या न इम्तहां लिया। सेक्टर-5 इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में रविवार को दास्तान ए लैला मजनू का मंचन स्वर्ग रंगमंडल ने किया। कलाकार अपने-अपने किरदारों में जब अरबी वेशभूषा के साथ मंच पर उतरे तो लैला मजनू का दौर जीवंत हो उठा।
दास्तान ए लैला मजनू की जीवंत एवं रसवंत गायकी दर्शकों के मन में रस घोलती रही और पारसी नाटकों के उर्दू जुबान की चाशनी में पगे संवादों ने समा बांध दिया। कलाकारों के बेहतरीन अभिनय ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। दास्तान ए लैला मजनू की प्रस्तुति का निर्देशन देश के प्रतिष्ठित सुविख्यात एवं लोकप्रिय रंग निर्देशक एवं लोक कलाविद् अतुल यदुवंशी ने किया।
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सर जमीने अरब पर कई छोटी-छोटी रियासतें थी। हर रियासत में एक जां नसीर रहता था जो बादशाह न कहलाकर अमीर कहलाता था। इनकी औलादों को आवाम मोहब्बत से शहजादा या शहजादी कहते थे। अल मुख्तशर इन्हीं रियासतों में एक रियासत में कैश मजनू और लैला रहते थे। कहते हैं कि बचपन से ही दोनों साथ खेलते पढ़ते बड़े हो रहे थे।
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एक-दूसरे के लिए कब बेपनाह चाहत की गिरफ्त में दोनों आ गए इसका उनको भी पता नहीं चला। मोहब्बत परवान चढ़ते-चढ़ते दोनों जब जवान हुए तो मोहब्बत अपनी हदों को पार कर गई। इसी परवान चढ़ने का नतीजा है कि मोहब्बत छुपाने से न छुपी और पूरी दुनिया पर छा गई। घर की बंदिशे अपने-परायों के ताने और जमाने के पत्थर भी लैला मजनू की मोहब्बत में असरगो नहीं हुए।
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