फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले दरिंदे को फांसी

Wed, 04 Jun 2025 01:28 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
जज बोले- दोषी समाज के लिए खतरा है और भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। चंडीगढ़ की जिला अदालत ने आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। सोमवार को कोर्ट ने दोषी हीरा लाल उर्फ गुड्डू को दोषी करार दिया था। जज ने फैसले में कहा कि दोषी समाज के लिए खतरा है और भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा। उसमें सुधार की भी कोई संभावना नहीं है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए उसे फांसी की सजा सुना दी। अदालत में बहस के दौरान बच्ची के परिवार का केस लड़ रहे वकील कमलेश मलिक ने कहा कि दोषी ने एक बच्ची के साथ ऐसी घटना को अंजाम दिया है, इसलिए वह रहम के लायक नहीं है। दोषी अगली बार फिर किसी बच्ची के साथ ऐसा न करे इसलिए उसे मौत की सजा सुनाई जानी चाहिए। वकील ने कहा कि दोषी को उम्रकैद की सजा देकर अगर जेल भेज दिया गया तो वहां उसे दाल रोटी तो मिल ही जाएगी, इसलिए उसे फांसी की सजा दी जानी चाहिए।

जनवरी 2024 का है मामला

19 जनवरी 2024 को आठ साल की बच्ची पड़ोस की एक दुकान से सामान खरीदने गई थी, लेकिन वह नहीं लौटी और लापता हो गई। शिकायत मिलने पर हल्लोमाजरा के पूर्व चौकी प्रभारी रवदीप सिंह ने बच्ची को ढूंढने के लिए टीमें लगाई। पुलिस ने शक के आधार पर पड़ोस के एक मकान की तलाशी ली तो वहां खून से सनी रजाई पड़ी थी। पास में एक चाकू पड़ा था। दोषी वहां से भाग चुका था। पुलिस ने बच्ची को तलाशना शुरू किया। दो दिन बाद पुलिस को बच्ची की लाश रामदरबार में शौचालय के पास जंगल में मिली।
विज्ञापन

सब इंस्पेक्टर रवदीप सिंह खुद एक टीम के साथ बिहार के आरा पहुंचे और चार से पांच दिन तक वहां आरोपी की तलाश की। रवदीप को दोषी के एक गांव में छिपे होने की जानकारी मिली। जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
इससे पहले 2007 में हुई थी फांसी की सजा
पंजाब के पूर्व सीएम सरदार बेअंत सिंह की 31 अगस्त 1995 को हत्या कर दी गई थी। जुलाई 2007 में चंडीगढ़ की विशेष अदालत ने बलवंत सिंह राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी। राजोआना को 31 मार्च 2012 को फांसी की सजा दी जानी थी, लेकिन 28 मार्च 2012 को तत्कालीन यूपीए सरकार ने फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी।
विज्ञापन



मेरे कार्यकाल का सबसे बड़ा केस : जांच अधिकारी
जांच अधिकारी रवदीप सिंह से जब इस मामले के संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल का यह सबसे बड़ा मामला था। यह पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर था। दोषी को बिहार के आरा से गिरफ्तार किया था। वह बार बार जगह बदल रहा था। चार से पांच दिन के बाद उसे पकड़ने में सफलता मिली।
-रवदीप सिंह, जांच अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें