कालका। कालका में कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अन्य जगह पर गंदगी का आलम है। शहर के कुछ भाग तो ऐसे हैं जो वहां पड़ी गंदगी के चलते डंपिंग ग्राउंड जैसे नजर आते हैं। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। काली माता मंदिर के आसपास का क्षेत्र डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होता जा रहा है। यही लोगों और श्रद्धालुओं के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बना हुआ है।
बता दें कि कुछ समय पहले प्रधानमंत्री के आहन पर पूरे देश में सफाई अभियान युद्ध स्तर पर छिड़ गया था, जिसके चलते कालका व आसपास के क्षेत्रों में भी भाजपा पार्टी वर्कर से लेकर निगम कर्मी व स्कूल कॉलेज के छात्रों ने भी सफाई अभियान में जोर शोर से अपनी सहभागिता दिखाई थी। परंतु कुछ समय बाद ही यह अभियान ठंडे बस्ते में सिमटता हुआ दिखाई देने लगा। हालांकि शुरुआती दिनों में भाजपा वर्करों व निगम पदाधिकारियों ने हाथ में झाड़ू ले कुछ एक भाग तक सफाई करते हुए खूब फोटो खिंचवाकर लोगों की वाहवाही लूटी, परंतु अब हालात यह हैं कि मानो कभी कोई सफाई अभियान शहर में चलाया ही नहीं गया।
शहर की गंदगी सुखना नदी के किनारे गिराई जा रही
लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक सिद्ध पीठ काली माता मंदिर के समीप स्थित एतिहासिक बावड़ी के सामने का एरिया भी निगम की लापरवाही की भेंट चढ़ता हुआ दिखाई पड़ता है। बता दें कि हिमाचल के प्रवेश द्वार व सिद्ध शक्ति पीठ के समीप होने के साथ-साथ पांडव कालीन बावड़ी भी यहां स्थित है बावजूद इसके लगभग आधे शहर की गंदगी यहां से निकलने वाली सुखना नदी के किनारे गिराई जाती है। नदी के किनारे गिराई जा रही गंदगी को देख ऐसा प्रतीत होता है मानो यहां निगम ने डंपिंग ग्राउंड ही बना दिया हो।
लगाए जाएं एंगल व जालियां
बता दें कि ओल्ड कालका-कसौली रोड से नीचे की ओर लोग अपने घरों का कूड़ा फेंक दिया करते थे जिसके चलते निगम ने कुछ समय पहले लोहे के लंबी-लंबी एंगल व जालियां लगवा दी थी जिसके बाद यहां फैलने वाली गंदगी पर काफी हद तक कंट्रोल भी हुआ था। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कालका-पिंजौर रोड पर बने पुल के दोनों और व काली माता मंदिर के समीप सुखना नदी में जहां अक्सर लोग कूड़ा गिराते हैं उस और भी प्रशासन लंबे-लंबे एंगल व जालियां लगवा इसे कवर करे ताकि यहां फैलने वाली गंदगी को रोका जा सके।
कोट
एसडीओ रविन्द्र मलिक ने बताया कि जल्द ही इन एरिया को गंदगी मुक्त करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।