एसटीएफ और विजिलेंस अधिकारी बनकर आए थे आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
हलवारा। पीएसपीसीएल के लुधियाना उप मंडल शहरी अड्डा दाखा के एसडीओ जसकिरनप्रीत सिंह और जेई परमिंदर सिंह को अगवा कर 7.20 लाख रुपये की फिरौती लेने वाले मुख्यारोपी घटना के 15 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। सूत्रों के अनुसार यह गिरोह एक डॉक्टर से भी फिरौती ले चुका है।
इस अपहरण कांड में दाखा पुलिस ने गिरोह के दो गुर्गों को घटना के तीसरे दिन गिरफ्तार कर लिया था। दाखा पुलिस ने आरोपी गुरविंदर और ब्रह्मप्रीत का तीन बार अदालत से रिमांड भी हासिल लिया लेकिन पटियाला निवासी मुख्यारोपी विनय अरोड़ा और अमनदीप सिंह के बारे में कुछ पता नहीं लग सका। गुरविंदर और ब्रह्मप्रीत को अब अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
इस गिरोह ने कभी विजिलेंस, एसटीएफ, पंजाब पुलिस, पत्रकार और सेहत विभाग आदि के अधिकारी बनकर बहुत लोगों को लूटा है लेकिन कई ने डर से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करवाई। सूत्रों से पता चला है कि उक्त गिरोह ने मोगा के एक मनोचिकित्सिक से 5 लाख रुपये की फिरौती ली थी। गिरोह ने वहां ड्रग इंस्पेक्टर और सेहत विभाग का छापा कहकर रुपये ऐंठ लिए थे। इसके अलावा जगरांव के भी किसी सरकारी अधिकारी से डेढ़ से दो लाख रुपये की फिरौती लेने की बात सामने आई है। आरोपियों के खिलाफ पहले से फिरौती वसूली, धोखाधड़ी और अन्य संगीन आपराधिक धारा में मुकदमे दर्ज हैं।
बता दें कि एसटीएफ और विजिलेंस के अधिकारी बनकर आए चारो आरोपियों ने 13 अक्टूबर को हथियारों के बल पर पीएसपीसीएल के एसडीओ जसकिरनप्रीत सिंह और जेइ परमिंदर सिंह को दाखा स्थित सरकारी दफ्तर से ही अगवा कर लिया था। उनसे सात लाख 20 हजार रुपये की फिरौती लेकर छोड़ा था।