अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पॉक्सो एक्ट के आरोपी के पीड़िता से विवाह के बंधन में बंध जाने और इस विवाह के बाद दंपती के तौर पर उनके एक बच्चे के अभिभावक बनने को आधार बनाकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज पाॅक्सो और एससी/एसटी एक्ट की एफआईआर को रद्द कर दिया है।
जस्टिस कीर्ति सिंह की एकल पीठ ने कहा कि जब अभियुक्त और पीड़िता विवाह बंधन में बंध चुके हैं और एक बच्चे के माता-पिता हैं तो मुकदमे को जारी रखना न्याय के हित में नहीं होगा।
मामला 5 अप्रैल 2021 की एफआईआर से जुड़ा है जो रोपड़ के थाना श्री चमकौर साहिब में दर्ज की गई थी। आरोप था कि याची ने एक नाबालिग लड़की को बहका-फुसलाकर भगा लिया था जिसके बाद दुष्कर्म, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट हर्ष राणा ने दलील दी कि यह प्रेम संबंध का मामला था और याची को झूठे आरोपों में फंसाया गया। उन्होंने बताया कि दोनों ने 12 जनवरी 2023 को आपसी सहमति से विवाह कर लिया और 15 अक्तूबर 2023 को उनके बेटे का जन्म हुआ। अदालत में विवाह प्रमाणपत्र और सेशन कोर्ट के संरक्षण आदेश भी प्रस्तुत किए गए। पीड़िता और उसके पिता ने भी हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि अब उनका विवाद समाप्त हो चुका है और वे किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं चाहते। इस पर अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में भले ही कानून कठोर हो, न्यायिक विवेक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है ताकि निर्दोष लोगों के जीवन पर विपरीत असर न पड़े। अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट, राजस्थान हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के उन फैसलों का उल्लेख किया जिनमें माना गया था कि यदि अभियुक्त और पीड़िता बाद में विवाह कर लें और साथ रह रहे हों तो मुकदमे को जारी रखना उनके परिवार के भविष्य को नष्ट कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता वास्तविक और स्वैच्छिक पाया गया है। इसलिए एफआईआर और उससे संबंधित सभी कार्यवाहियों को रद्द किया जाता है। इस प्रकार हाईकोर्ट ने याची को बड़ी राहत देते हुए मामला समाप्त कर दिया और लंबित याचिकाओं को भी निपटा दिया।