चंडीगढ़। तरनतारन पंथक सीट मानी जाती है। पंथ संबंधी एजेंडों का यहां काफी असर रहता है। इस बार भी विभिन्न मुद्दों के साथ-साथ सियासी दल इस एजेंडे को लेकर बढ़ रहे हैं और गुपचुप ढंग से इस मुद्दे पर गोलबंदी करना चाहते हैं।
हर सियासी पार्टी मतदाताओं को यह समझाने और बताने का प्रयास कर रही है कि अन्य मसलों के अलावा पंथ के प्रति उनकी संजीदगी व गंभीरता सबसे ज्यादा है। दूसरी ओर, इस सीट पर महिलाओं व युवाओं पर भी सभी दलों की नजर है, क्योंकि वे इन्हीं वर्गाें को इस चुनाव में बड़े किंगमेकर मान रहे हैं।
इस उपचुनाव में 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। प्रमुख दलों में सुखविंदर कौर (शिरोमणि अकाली दल), हरजीत सिंह संधू (भाजपा), हरमीत सिंह संधू (आप) और करणबीर सिंह (कांग्रेस) जीत के लिए खूब जोर आजमाइश कर रहे हैं। इसके अलावा मनदीप सिंह खालसा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। मनदीप को जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे), ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत), शिअद (अमृतसर) और अन्य सिख संगठनों का समर्थन प्राप्त है। मनदीप खालसा और उनके समर्थक दल पूरी तरह से पंथक एजेंडे को लेकर गुपचुप बैठकें कर मतदाताओं का समर्थन मांग रहे हैं।
दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल (बादल) भी इस बात का प्रचार कर रहा है कि एक क्षेत्रीय पार्टी ही पंथक मसलों पर ज्यादा गंभीर हो सकती है और यह उनके दल की प्राथमिकताओं में शामिल भी है मगर शिअद के इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी बरगाड़ी और बहिबलकलां कांड की याद दिलवाकर उन्हें घेर रही है। इसके अलावा यहां गैंगस्टरवाद भी उपचुनाव में मुद्दा बना हुआ है। विरोधी दल इस मुद्दे पर आप सरकार को घेर रहे हैं। पिछले दिनों यहां कारोबारियों को धमकाने व चौथ मांगने की भी शिकायतें सामने आई हैं।
उधर, तरनतारन में कुल मतदाताओं 192838 में से 91897 महिला मतदाता हैं, इन पर भी सभी दलों की नजर है। फिलहाल मैदान में दो महिला प्रत्याशी हैं मगर शिअद प्रत्याशी सुखविंदर कौर की पकड़ महिलाओं पर अच्छी मानी जा रही है। दूसरी महिला हरबरिंदर कौर उसमां बतौर आजाद प्रत्याशी मैदान में हैं।