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पंजाब यूनिवर्सिटीः सिंडिकेट चुनाव से पहले हट जाएगी शिक्षकों की नियुक्तियों पर रोक, मांगा ब्यौरा

Wed, 13 Nov 2019 12:31 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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26 शिक्षकों की नियुक्तियों पर लगी रोक सिंडिकेट के चुनाव से पहले हट जाएगी। माना जा रहा है कि इसी माह के आखिर तक सिंडिकेट के सदस्यों की बैठक होगी। इस बैठक में मांगा गया पूरा रिकॉर्ड कमेटी के सदस्य जांचेंगे और फिर रिकॉर्ड ठीक मिलने के बाद 26 शिक्षकों की नियुक्ति पर लगी रोक हटा ली जाएगी। वहीं, कुछ अन्य विभागों में भी शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए हरी झंडी मिल सकती है।
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पीयू ने तीन माह पहले 26 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्तियां निकालीं थीं। उसके बाद से अभ्यर्थियों ने आवेदन करना शुरू कर दिया लेकिन इस पर सिंडिकेट की बैठक में सदस्यों ने रोक लगा दी। सिंडिकेट के मेंबर्स का कहना था कि विभागवार जो नियुक्तियां निकाली गईं हैं, वह मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जहां शिक्षकों की अधिक आवश्यकता है और वहां पद खाली भी हैं, उन विभागों को दरकिनार किया गया।

साथ ही अन्य विभागों में नियुक्तियां निकाल दी गईं। नियुक्तियों के लिए आवेदन जब आए तो पीयू प्रशासन पर दबाव पड़ा और इस मामले में निर्णय लेने के लिए कमेटी बना दी गई। इसमें सिंडिकेट व सीनेट के मेंबर शामिल किए गए। इस प्रकरण पर पहली बैठक हुई तो सभी मेंबर्स ने कहा कि पीयू की इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच से इसका पूरा रिकॉर्ड मांगा जाए जिसमें यह प्रूफ हो सके कि जो नियुक्तियां निकाली हैं वह सही हैं और वहां पद रिक्त हैं।
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साथ ही यह भी रिकॉर्ड मांगा गया कि सबसे कम शिक्षक किस विभाग में हैं और विद्यार्थी किस विभाग में अधिक हैं। सूत्रों का कहना है कि यह रिकॉर्ड तैयार हो गया। इसकी जांच कमेटी करेगी। इस माह के आखिरी सप्ताह तक कमेटी की बैठक होगी। प्रथम दृष्टया मांगा गया रिकॉर्ड दुरुस्त बताया जा रहा है। इसी के चलते नियुक्तियों को हरी झंडी मिल जाएगी।

कर्मचारियों के पद भरने को लेकर संजीदा नहीं है पीयू
पीयू में हर साल विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। कॉलेजों में भी छात्र अधिक हो रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों पर अधिक भार पड़ रहा है। सैकड़ों पद कर्मचारियों के खाली चल रहे हैं लेकिन उन पदों को भरने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यही हाल रहा तो पीयू में विद्यार्थियों के कार्य लेट होंगे। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि कई बार कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने भी यह मांग उठाई लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
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